महत्त्वाकांक्षा, प्यार और स्वार्थ। दीपक को अपने जीवन का सार यही लगता है। लेकिन उसे महसूस होता है कि जीवन से उसे कुछ नहीं मिला। पत्नी के रूप में उसे अहिल्या मिली जबकि वह चाहता था कि उसकी शादी किसी आधुनिक लड़की से होती। इसलिए वह हमेशा किसी पराई डाल की तलाश में रहता है, मित्रों के घर में, उनकी पत्नियों से ऐसा व्यवहार कर जाता है जो अपेक्षित नहीं है।
इसके लिए उसे कई बार अपमान का पात्र भी बनना पड़ता है, जिसके चलते कुछ समय के लिए वह एक संयमित पारिवारिक जीवन बिताने और अपने मन के ऊपर नियन्त्रण रखने का संकल्प भी लेता है।
लेकिन फिर रेखा उसकी जिन्दगी में आती है। साहित्य में रुचि रखनेवाली एक मेधावी छात्रा। दीपक की बौद्धिक बातों से वह उसके प्रेमपाश में बँध जाती है और दीपक एक बार फिर अहिल्या से दूर अपने सुख की तलाश में चल देता है...
इस मनोविश्लेषणात्मक उपन्यास में अमरकान्त एक मध्यवर्गीय परिवार में स्त्री की स्थिति को भी भली-भाँति चित्रित करते हैं, और समाज के सम्बन्धों को भी जिनका आधार बहुत छोटे-छोटे स्वार्थ होते हैं।
| Language | Hindi |
|---|---|
| Binding | Paper Back |
| Translator | Not Selected |
| Editor | Not Selected |
| Publication Year | 2025 |
| Edition Year | 2025, Ed. 1st |
| Pages | 184p |
| Publisher | Rajkamal Prakashan |
| Dimensions | 20 X 13 X 1 |