Kale-Ujale Din

Author: Amarkant
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Kale-Ujale Din
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वस्तुतः हमारा आज का जीवन कई खंडों में बिखरा हुआ-सा नज़र आता है। सामाजिक ढाँचे में असंगतियाँ और विषमताएँ हैं, जिनकी काली छाया समाज के प्रत्येक सदस्य के व्यक्तिगत जीवन पर पड़े बिना नहीं रहती। इसीलिए एक बेपनाह उद्देश्यहीनता और निराशा आज हरेक पर छाई हुई है। स्वस्थ, स्वाभाविक और सच्चे जीवन की कल्पना भी मानो आज दुरूह हो उठी है।

इस कथानक के सभी पात्र ऐसे ही अभिशापों से ग्रस्त हैं। मूल नायक तो बचपन से ही अपने सही रास्ते से भटककर ग़लत रास्तों पर चला जाता है। उसके माता-पिता और परिजन भी तो भटके हुए थे। लेकिन वह अपने भटकाव में ही अपनी मंज़िल को पा लेता है। क्या इस तरह इस कथानक का सुखद अन्त होता है? नहीं। आँसू का अन्तिम क़तरा तो सूखता ही नहीं। संयोग और दुर्घटना का सुखान्त कैसा? मानव-जीवन कोई दुर्घटनाओं और संयोगों की समष्टि मात्र नहीं है! जब तक सारी सामाजिक व्यवस्था बदल नहीं जाती, जब तक हमारा जीवन-दर्शन आमूल बदल नहीं जाता, तब तक ऐसी दुर्घटनाएँ होती रहेंगी—चाहे उनका परिणाम दुःखद हो या सुखद।

आज की समाज-व्यवस्था के परिवर्तन के साथ नारी की स्वतंत्रता का प्रश्न भी जुड़ा हुआ है। क्रान्ति का त्यागमय जीवन उसके जीवन-काल में क्या मर्यादा पा सका? उसके आदर्श को क्या उचित मूल्य मिला? रजनी का त्याग भी क्या सम्मान पा सका? उसकी सहानुभूति, ममता और प्रेम-भावना क्या आँसू से भीगी नहीं हैं? क्या उसके जीवन का सुख किसी और के दुःख पर आश्रित नहीं है?

इन्हीं सब प्रश्नों की गुत्थियाँ अमरकान्त का यह उपन्यास खोलता है।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2003
Edition Year 2003, Ed. 1st
Pages 163p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 1.5
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Author: Amarkant

अमरकान्त

जन्म : 1 जुलाई, 1925; ग्राम–भगमलपुर (नगरा), ज़िला–बलिया, (उ.प्र.)।

प्रकाशित कृतियाँ : उपन्यास–‘सूखा पत्ता’, ‘काले-उजले दिन’, ‘कँटीली राह के फूल’, ‘ग्रामसेविका’, ‘सुखजीवी’, ‘बीच की दीवार’, ‘सुन्नर पांडे की पतोह’, ‘आकाश पक्षी’, ‘इन्हीं हथियारों से’; कहानी-संग्रह : ‘ज़िन्दगी और जोंक’, ‘देश के लोग’, ‘मौत का नगर’, ‘मित्र-मिलन तथा अन्य कहानियाँ’, ‘कुहासा’, ‘तूफ़ान’, ‘कलाप्रेमी’, ‘एक धनी व्यक्ति का बयान’, ‘सुख और दुःख का साथ’, ‘प्रतिनिधि कहानियाँ’, ‘दस प्रतिनिधि कहानियाँ’, ‘अमरकान्त की सम्पूर्ण कहानियाँ’ (दो खंडों में); संस्मरण : ‘कुछ यादें, कुछ बातें’; बाल-साहित्य : ‘नेऊर भाई’, ‘वानर सेना’, ‘खूँटा में दाल है’, ‘सुग्गी चाची का गाँव’, ‘झगरू लाल का फ़ैसला’, ‘एक स्त्री का सफ़र’, ‘मँगरी’, ‘बाबू का फ़ैसला’, ‘दो हिम्मती बच्चे’।

पुरस्कार व सम्मान : ‘ज्ञानपीठ पुरस्‍कार’, ‘साहित्य अकादेमी पुरस्‍कार’, ‘व्‍यास सम्‍मान’, ‘सोवियतलैंड नेहरू पुरस्कार’, ‘मैथिलीशरण गुप्त पुरस्कार’, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का पुरस्कार, ‘यशपाल पुरस्कार’, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग का सम्मान, ‘जन-संस्कृति सम्मान’, मध्य प्रदेश का ‘अमरकान्त कीर्ति सम्मान’ आदि से सम्‍मानित।

विशेष : विदेशी भाषाओं, प्रादेशिक भाषाओं, पेंग्विन इंडिया में कहानियाँ प्रकाशित, दूरदर्शन पर कहानियों पर फ़िल्में प्रदर्शित, रंगमंच पर कहानियों के नाट्य-रूपान्तरों का प्रदर्शन।

निधन : 17 फरवरी, 2014

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