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Lahrein

Author: Amarkant
Edition: 2025, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Lahrein

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सामाजिक सरोकारों को लेकर अत्यन्त सचेत कथाकार अमरकान्त के इस उपन्यास के केन्द्र में क़स्बाई परिवेश की साधारण घरेलू महिलाएँ हैं जो धीरे-धीरे पुरुषप्रधान पारिवारिक व्यवस्था में अपनी अस्मिता और स्थिति के प्रति सजग होती हैं।

उनका यह सफ़र शुरू होता है उस वक़्त जब मुहल्ले में किराये पर रहने वाला एक आत्ममुग्ध व्यक्ति बरसों से गाँव में छोड़ी अपनी पत्नी को लेकर आता है। यह सीधी-सादी ग्रामीण स्त्री बस एक सवाल से वहाँ की सुखी-सन्तुष्ट स्त्रियों को ‌झिंझोड़ देती है—‘ख़ूब कहती हो बहिनी, कहीं सुहागिन स्त्री का नाम पूछता है कोई? नाम लेकर बुलाता है भला?’

इस सवाल का जवाब किसी से नहीं बन पाता। वे सोचने लगती हैं कि वाक़ई, अपने ही विवाहित जीवन में, अपने ही परिवार में उनका नाम कैसे ग़ायब हो गया!

यहीं से शुरू होता है उनका आत्म-चिन्तन जो पहले अकेले-दुकेले और फिर नियमित बैठकों तक जाता है और एक संस्था के रूप में फलीभूत होता है। अपनी पहचान को लेकर सजग होती स्त्रियों की विचारोत्तेज कथा है यह कृति। 

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 104p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 20 X 13 X 1
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Amarkant

Author: Amarkant

अमरकान्त

जन्म : 1 जुलाई, 1925; ग्राम–भगमलपुर (नगरा), ज़िला–बलिया, (उ.प्र.)।

प्रकाशित कृतियाँ : उपन्यास–‘सूखा पत्ता’, ‘काले-उजले दिन’, ‘कँटीली राह के फूल’, ‘ग्रामसेविका’, ‘सुखजीवी’, ‘बीच की दीवार’, ‘सुन्नर पांडे की पतोह’, ‘आकाश पक्षी’, ‘इन्हीं हथियारों से’; कहानी-संग्रह : ‘ज़िन्दगी और जोंक’, ‘देश के लोग’, ‘मौत का नगर’, ‘मित्र-मिलन तथा अन्य कहानियाँ’, ‘कुहासा’, ‘तूफ़ान’, ‘कलाप्रेमी’, ‘एक धनी व्यक्ति का बयान’, ‘सुख और दुःख का साथ’, ‘प्रतिनिधि कहानियाँ’, ‘दस प्रतिनिधि कहानियाँ’, ‘अमरकान्त की सम्पूर्ण कहानियाँ’ (दो खंडों में); संस्मरण : ‘कुछ यादें, कुछ बातें’; बाल-साहित्य : ‘नेऊर भाई’, ‘वानर सेना’, ‘खूँटा में दाल है’, ‘सुग्गी चाची का गाँव’, ‘झगरू लाल का फ़ैसला’, ‘एक स्त्री का सफ़र’, ‘मँगरी’, ‘बाबू का फ़ैसला’, ‘दो हिम्मती बच्चे’।

पुरस्कार व सम्मान : ‘ज्ञानपीठ पुरस्‍कार’, ‘साहित्य अकादेमी पुरस्‍कार’, ‘व्‍यास सम्‍मान’, ‘सोवियतलैंड नेहरू पुरस्कार’, ‘मैथिलीशरण गुप्त पुरस्कार’, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का पुरस्कार, ‘यशपाल पुरस्कार’, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग का सम्मान, ‘जन-संस्कृति सम्मान’, मध्य प्रदेश का ‘अमरकान्त कीर्ति सम्मान’ आदि से सम्‍मानित।

विशेष : विदेशी भाषाओं, प्रादेशिक भाषाओं, पेंग्विन इंडिया में कहानियाँ प्रकाशित, दूरदर्शन पर कहानियों पर फ़िल्में प्रदर्शित, रंगमंच पर कहानियों के नाट्य-रूपान्तरों का प्रदर्शन।

निधन : 17 फरवरी, 2014

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