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Nij Brahma Vichar : Darma, Samaj Aur Dharmetar Adhyatma

Edition: 2026, Ed 3rd
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Nij Brahma Vichar

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धर्म के सामान्य अनुयायी, साधारण आस्थावान लोग हों या धर्म को हिंसक राजनीति में बदलनेवाले चतुर सुजान, धर्म के अध्येता हों या कठोर आलोचक और घोर विरोधी—अपने सारे मतभेदों के बावजूद इनमें से अधिकांश एक बात पर सहमत हैं। वह यह कि धर्म और अध्यात्म एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। या तो अध्यात्म फिजूल की बात है, या फिर धर्म ही अध्यात्म का एकमात्र आधार और माध्यम है। या तो अध्यात्म का आशय है—समाजनिरपेक्ष आत्मलीनता या अध्यात्म का अर्थ है प्रतिक्रियावादी रहस्यवाद। दोनों में से किसी भी तर्क-पद्धति को अपनाइए, निष्कर्ष पहले से तय है : यदि अध्यात्म के प्रश्नों में आपकी दिलचस्पी है तो आप धर्म को अपनाइए; यदि आप धर्म से असुविधा महसूस करते हैं तो अध्यात्म को भी साथ-साथ खारिज कर दीजिए।

परस्पर विरोधी तर्क-पद्धतियों का निष्कर्ष के धरातल पर यह सामंजस्य अद्भुत है। धर्मेतर अध्यात्म की सम्भावनाओं पर विचार का प्रस्ताव इस परिप्रेक्ष्य में ‘निज ब्रह्म विचार’ ही नहीं देती बल्कि विरुद्धों के इस सामंजस्य से टकराने का, और हो सके तो इसके परे जाने का प्रस्ताव भी देती है।

दैनिक ‘जनसत्ता’ में लम्बे समय तक प्रकाशित होने वाला, पुरुषोत्तम अग्रवाल का चर्चित कॉलम ‘मुखामुखम’ विवेकसम्मत ढंग से सोचने-विचारने के लिए प्रेरित करता रहा। सैद्धान्तिक प्रश्नों से जूझने से लेकर अटलांटा, वर्धा और गोपेश्वर के अनुभव-संवेदनों को पाठकों के सामने प्रस्तुत करने तक के रूप में ये लेख लगातार उत्सुकता के साथ पढ़े गए। जाने-माने बुद्धिजीवियों से लेकर पाठकों तक सभी ने इनमें विशेष दिलचस्पी जाहिर की। बहसें भी हुईं। शुरुआती एक वर्ष (मई 2003-मई 2004) में प्रकाशित चर्चित लेख यहाँ पुस्तक रूप में प्रस्तुत हैं। लेखक ने इनमें वे आवश्यक पाद-टिप्पणियाँ और सन्‍दर्भोल्लेख भी जोड़ दिये हैं, जो अखबार में नहीं आ सकते थे, लेकिन जरूरी थे।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2004
Edition Year 2026, Ed 3rd
Pages 132p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 2
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Purushottam Agrawal

Author: Purushottam Agrawal

पुरुषोत्तम अग्रवाल

पुरुषोत्तम अग्रवाल का जन्म ग्वालियर, मध्य प्रदेश में हुआ। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से पी-एच.डी. की डिग्री प्राप्त की और रामजस कॉलेज, दिल्ली तथा जेएनयू में अध्यापन कार्य किया। संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य रहे।

उनकी प्रकाशित कृतियाँ हैं—‘संस्कृति : वर्चस्व और प्रतिरोध’, ‘तीसरा रुख’, ‘विचार का अनन्त’, ‘शिवदानसिंह चौहान’, ‘निज ब्रह्म विचार’, ‘कबीर : साखी और सबद’, ‘हिन्दी सराय : अस्त्राखान वाया येरेवान’, ‘नाकोहस’, ‘कौन हैं भारत माता’ तथा ‘पद्मावत : एन एपिक लव स्टोरी’, ‘कबीर, कबीर : द लाइफ एंड वर्क ऑफ द अर्ली मॉडर्न पोएट-फिलॉसफर’ (अंग्रेजी में)। उनकी पुस्तक ‘अकथ कहानी प्रेम की : कबीर की कविता और उनका समय’ भक्ति-सम्बन्धी विमर्श का अनिवार्य ग्रन्थ है। वे राजकमल प्रकाशन की ‘भक्ति शृंखला’ के भी सम्पादक हैं।

वे ‘साहित्य अकादमी भाषा सम्मान’ सहित अन्य कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित हैं।

सम्पर्क : [email protected]

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