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Mohalla Assi

Editor: Ajay Brahmatmaj
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Mohalla Assi

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साहित्य अकादेमी पुरस्कार से पुरस्कृत कथाकार काशीनाथ सिंह की औपन्यासिक कृति ‘काशी का अस्सी’ अपने प्रकाशन के बाद से लगातार हिन्दी के पाठकों को आक‌र्षित करती रही है। खिलंदड़ और सीधे आम आदमी से ली गई इसकी भाषा, इसके सजीव पात्र और बनारस के मुहल्लों-गलियों को चित्रों की तरह उपस्थ‌ति करती हुई यह कृति आज हर पाठक की प्रिय पुस्तकों में शामिल है।

इसी उपन्यास के एक अध्यापन ‘पांड़े कौन कुमति तोहे लागी’ को लेकर प्रस‌द्धि फिल्म निर्देशक डॉ. चन्द्रप्रकाश द्विवेदी ने ‘मोहल्ला अस्सी’ नाम से एक फ़िल्म बनाई। इस पुस्तक में उसी पुस्तक की पटकथा और ‘काशी का अस्सी’ का सम्बन्धित अध्याय संकलित है। साथ ही डॉ. चन्द्रप्रकाश की एक भू‌मिका भी जिससे पता चलता है कि किसी सा‌हि‌त्यिक कृति को फिल्म के फॉर्म में ढालने की प्र‌क्रिया क्या होती है; और उन्होंने इस चुनौती को कैसे हल किया।

एक सांस्कृतिक शहर में बाजारवाद कैसे आता है, और कैसे वह वहाँ के लोगों की सोच-समझ और प्राथमिकताओं को बदलता है, यह फ़िल्म इसी कथ्य को केन्द्र में रखती है।

धा‌र्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने और कुछ शब्दों के प्रयोग को लेकर यह फिल्म सेंसर बोर्ड में भी काफी समय तक अटकी रही। फिर मामला कोर्ट में पहुँचा। इस सबके चलते 2015 में तैयार हो चुकी फ़िल्म 2018 में दर्शकों तक पहुँची। इस किताब में अदालत का वह फैसला भी शामिल किया गया, जिसके बाद फ़िल्म रिलीज हो सकी।

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Ajay Brahmatmaj
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 288p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 2
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Dr. Chandra Prakash Dwivedi

Author: Dr. Chandra Prakash Dwivedi

डॉ. चन्द्रप्रकाश द्विवेदी

चन्द्रप्रकाश द्विवेदी का बचपन संस्कृत और संस्कृति के वातावरण में बिता। पिता संस्कृत के अध्यापक थे और सबसे बड़े भाई हिन्दी साहित्य के। नाटक में रुचि भी बड़े भाई के कारण हुई। घर में संस्कृत के विद्यार्थियों, कथा वाचकों, साधु-सन्तों से सम्पर्क के कारण प्राचीन भारतीय साहित्य में रुचि रही। भारतीय समाज और इतिहास में उनकी गहरी रुचि आगे चलकर ‘चाणक्य’, ‘मृत्युंजय’, ‘उपनिषद गंगा’ जैसे धारावाहिकों और ‘पिंजर’, ‘मोहल्ला अस्सी’, ‘जेड प्लस’, ‘सम्राट पृथ्वीराज’ जैसी फ़िल्मों में विकसित हुई। लगभग उनकी सारी कृतियाँ प्राचीन अथवा आधुनिक साहित्य पर आधारित रही हैं। वे ‘राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार’, ‘डॉक्टर हेडगेवार प्रज्ञा सम्मान’, ‘धरोहर सम्मान’, ‘हिन्दी सेवी सम्मान’, ‘उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी सम्मान’, और ‘पद्म श्री’ से सम्मानित हैं।

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