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Mandavi

Author: Asha Prabhat
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Mandavi

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‘मांडवी’ रामकथा की स्त्री-चरित्रों को लेकर संवेदनशील रही आशा प्रभात की लेखनी का नया पड़ाव है। इससे पहले वह ‘मैं जनकनन्दिनी’ और ‘उर्मिला’ लिख चुकी हैं।

‘मांडवी’ भरत की पत्नी थीं जिनके विषय में न तो रामकथा में बहुत विस्तार से कुछ आता है, न ही बाद के विद्वानों-साहित्यकारों ने उन पर कुछ ख़ास ध्यान दिया, जबकि राम-वनवास के दौरान उन्होंने सम्भवतः लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला से भी ज़्यादा पीड़ा का वहन किया होगा।

आशा प्रभात एक सजग लेखिका के रूप में यह ठीक ही प्रश्न उठाती हैं कि रामायण के पुरुष-पात्र जहाँ इतने पराक्रमी, प्रज्ञावान और गुणवान थे, तो फिर स्त्री-पात्र क्या इतने संवेदनहीन और प्रज्ञाशून्य थे कि उनकी मनस्थिति का विस्तृत चित्रण करना कवियों की अनिवार्य नहीं लगा।

इसी से प्रेरित होकर उन्होंने सीता और उ‌‌र्मिला के बाद अब मांडवी को अपना विषय बनाया जो दुर्भाग्य से उस कैकेयी की बहू भी थी जिसके चलते राम को वनवास हुआ और उनसे जुड़े तमाम पात्रों, ख़ासकर स्त्रियों को इतना कुछ झेलना पड़ा।

यह उपन्यास एक पौराणिक चरित्र की भावभूमि का अन्वेषण करते हुए स्त्री-मात्र की व्यथा को समझने का प्रयत्न करता है, और रामकथा के महत्त्वपूर्ण लेकिन उपेक्षित चरित्र को, उसके पूरे व्यक्तित्व के साथ रेखांकित करता है। 

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 240p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1.5
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Asha Prabhat

Author: Asha Prabhat

आशा प्रभात

आशा प्रभात का जन्म 21 जुलाई, 1958 को हुआ। उन्होंने कविता, कहानी, उपन्यास आदि सभी विधाओं में समान अधिकार से लिखा है। हिन्दी और उर्दू में अब तक उनकी 19 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें सात उपन्यास—‘धुंध में उगा पेड़’, ‘जाने कितने मोड़’, ‘मैं और वह’, ‘गिरदाब’, ‘मैं जनकनन्दिनी’, ‘उर्मिला’, ‘मांडवी’; चार कहानी-संग्रह और दो काव्य-संग्रह शामिल हैं। उन्होंने ‘साहिर समग्र’ और ‘जब धरती नग़्मे गाएगी’ का संकलन-सम्पादन किया है। हिन्दी से उर्दू और उर्दू से हिन्दी में अनूदित उनकी पाँच पुस्तकें प्रकाशित हैं। उनकी रचनाओं का हिन्दी और उर्दू की पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन और आकाशवाणी व दूरदर्शन से प्रसारण होता रहा है।

उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हो चुके हैं जिनमें ‘काव्य संगम पुरस्कार’, ‘प्रेमचन्द सम्मान’, बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना का ‘साहित्य सेवा सम्मान’, ‘दिनकर सम्मान’, ‘साहित्य महोपाध्याय सम्मान’, बिहार उर्दू अकादमी, पटना का ‘सुहैल अज़ीमाबादी अवार्ड’ व ‘खसूसी अवार्ड’, ए.बी.आई. का ‘वुमन ऑफ़ दी इयर अवार्ड 1998’, दैनिक जागरण का ‘शताब्दी सम्मान’, प्रभात ख़बर का ‘अपराजिता सम्मान’, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन, पटना का ‘शताब्दी सम्मान’ और दैनिक भास्कर का ‘वुमन प्राइड अवार्ड’ शामिल हैं।

फ़िलहाल स्वतंत्र लेखन और पत्रकारिता कर रही हैं।

ई-मेल : [email protected] 

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