कुमार अंबुज की कविताओं में एक तरह की ऐसी ताज़गी, सहजता और ओढ़ी हुई वैचारिक मुद्रा की अनुपस्थिति है जो उन्हें बहुत से समकालीन युवा कवियों से अलग करती है। 'किवाड़' में सामान्य परिचित वस्तुएँ और स्थितियाँ ऐसे गहरे लगाव और अभिव्यक्ति के संयम के साथ प्रस्तुत हुई हैं कि उनसे मानवीय सम्बन्धों और सच्चाइयों की सूक्ष्म अनुगूँज सुनाई पड़ती है।
—नेमिचन्द्र जैन
कुमार अंबुज के पास दृष्टि की तलाश और बोध का धरातल है और यही बात उनकी कविताओं में व्यक्त अनुभव लोक को मूर्त और सार्थक बनाती है। कवि की चिन्ताएँ ज़्यादा बड़ी हैं, उनकी जड़ें दूर तक फैली हुई हैं—अपने आसन्न परिवेश से मनुष्य के सुदूर इतिहास तक। यहाँ अपने समय के अतुकान्त जीवन के लिए तुकें ढूँढ़ने की यह रचनात्मक लड़ाई पाठक को ऐसे बिन्दु तक ले जाती है जहाँ जीवन और काव्य के बीच का पार्थक्य समाप्त हो जाता है।
—केदारनाथ सिंह
| Language | Hindi |
|---|---|
| Binding | Hard Back, Paper Back |
| Translator | Not Selected |
| Editor | Not Selected |
| Publication Year | 1992 |
| Edition Year | 2025, Ed. 5th |
| Pages | 127p |
| Publisher | Radhakrishna Prakashan |
| Dimensions | 22 X 14 X 1.5 |