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Kirtishesh : Mohan Rakesh

Author: Jaidev Taneja
Edition: 2025, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Radhakrishna Prakashan
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Kirtishesh : Mohan Rakesh

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मोहन राकेश के समृद्ध और बहुआयामी व्यक्तित्व के अनेक पक्ष थे, जो शायद किसी एक मित्र के साथ पूरी तरह शेयर नहीं किये जा सकते थे। लेकिन यह भी सच है कि उन्होंने जिस मित्र के साथ जो पहलू शेयर किया, वह पूरी ईमानदारी के साथ किया।

फिर भी, आज इतने समय के बाद भी उनके दोस्त और दुश्मन, प्रशंसक और आलोचक, दर्शक, पाठक और इतिहासकार यही तय नहीं कर पाए कि वह व्यक्ति वास्तव में था क्या? उसके कृतित्व का मूल्य और मह​त्त्व क्या और कितना है? वह असीम भावुक था या चरम बौद्धिक?​ अत्यन्त महत्त्वाकांक्षी अवसरवादी था या तमाम उपलब्धियों के मोहपाश को पल-भर में काटकर किसी नये, अज्ञात और बड़े लक्ष्य की ओर निर्भय आगे बढ़ जानेवाला निरासक्त संन्यासी?​

मोहन राकेश के अन्तर्विरोधी एवं चौंकानेवाले अप्रत्याशित-अनपेक्षित कारनामों को लेकर उनके दोस्त और दुश्मन समान रूप से सच्चे-झूठे किन्तु चकित करनेवाले क़िस्से, प्रसंग, लतीफ़े, कथा-कहानियाँ, ख़बरें और अफ़वाहें रचते रहे हैं। सत्य और कल्पना तथा हक़ीक़त और फ़सानों से उपजी इस धुंध ने राकेश के जीवनकाल में ही उन्हें एक जीवित किंवदन्ती बना दिया था।​

‘कीर्तिशेष : मोहन राकेश’ पुस्तक उन्हें, उनके जटिल व्यक्तित्व को एक नये सिरे से समझने का रास्ता खोलती है। यहाँ आप उनके समकालीनों, सह‌कर्मियों, मित्रों, सम्पादकों, प्रकाशकों, नाट्य-निर्देशकों, अभिनेताओं, फ़िल्मकारों, आलोचकों, मीडिया-कर्मियों और शिष्यों के संस्मरण पढ़ेंगे। उम्मीद है कि इनसे हम मोहन राकेश के व्यक्तित्व को कुछ बेहतर समझ सकेंगे।

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 416p
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 2.5
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Jaidev Taneja

Author: Jaidev Taneja

जयदेव तनेजा

जयदेव तनेजा का जन्म 15 मार्च, 1943 को ओकाड़ा (अब पाकिस्तान में) में हुआ। उनकी मोहन राकेश सम्बन्धी प्रकाशित कृतियाँ हैं—‘लहरों के राजहंस : विविध आयाम’, ‘मोहन राकेश : रंग-शिल्प और प्रदर्शन’, ‘मोहन राकेश : अधूरे रिश्तों की पूरी दास्तान’, ‘मोहन राकेश रचनावली’ (13 खंड), ‘राकेश और परिवेश : पत्रों में’, ‘एकत्र’ (मोहन राकेश की अप्रकाशित-असंकलित रचनाएँ), ‘पुनश्च’ (राकेश और अश्क दम्पति का पत्राचार), ‘नाट् य-विमर्श : मोहन राकेश’, ‘मेरे साक्षात्कार’, ‘दस प्रतिनिधि कहानियाँ’, ‘पूर्वाभ्यास’ (मोहन राकेश के आरम्भिक एकांकी), ‘काँपता हुआ दरिया’ (मोहन राकेश का उपन्यास)।    

वे ‘श्रेष्ठ साहित्यिक कृति पुरस्कार’ (हिन्दी अकादमी), ‘विश्व रंगमंच दिवस सम्मान’ (दिल्ली नाट् य संघ), ‘साहित्यकार सम्मान’ (हिन्दी अकादमी), ‘पं. सत्यदेव दुबे राष्ट्रीय सम्मान’ (रास कलामंच हरियाणा), ‘नाटक सम्मान’ (हिन्दी अकादमी), ‘संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार’ से सम्मानित हैं। ‘नट सम्राट’ (दिल्ली), ‘अंक’ (मुम्बई) ने उन्हें सम्मानित किया है। 2024 में ‘पंचानन पाठक जीवन गौरव सम्मान’ तथा ‘कारवाँ-ए-हबीब सम्मान’ से भी नवाजे गए हैं।

ई-मेल : [email protected]

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