Kali Mitti Par Pare Ki Rekha

Literary Criticism
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Kali Mitti Par Pare Ki Rekha
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डॉ. कन्हैया सिंह जी अपने यशस्वी जीवन के 85वें वर्ष पूर्ण कर 86वें वर्ष में प्रवेश करने के अवसर पर प्रकाशित यह ग्रन्थ पूरे देश के विद्वानों से प्राप्त पत्र-पुष्प है। अल्प समय में इतनी बड़ी संख्या में विद्वानों ने अपने आलेख भेजे हैं जो डॉ. कन्हैया सिंह जी की कीर्ति और साहित्यिक सक्रियता का परिणाम है। राजस्थान के माननीय राज्यपाल
श्री कलराज मिश्र, उत्तर प्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गोवा की पूर्व राज्यपाल माननीय मृदुला सिन्हा, केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के पूर्व उपाध्यक्ष, डॉ. कमल किशोर गोयनका के आलेख ने इस ग्रन्थ की गरिमा को बढ़ाया है। हिन्दी के अनेक यशस्वी साहित्यकारों और आलोचकों के साथ ही युवा लेखकों की भागीदारी ने भी इसे महत्त्वपूर्ण बनाया है।

डॉ. कन्हैया सिंह जी का जीवन और उनके द्वारा रचित समस्त साहित्य को केन्द्र में रखते हुए इस पुस्तक को पाँच खंडों में संयोजित किया गया है—‘जीवन पर्व : संघर्ष एवं साधना का उज्ज्वल इतिहास’ पहला खंड है। जिसमें विभिन्न लेखकों द्वारा लिखे गए संस्मरण और
डॉ. कन्हैया सिंह जी के जीवन सम्बन्धी आलेख हैं। पुस्तक का द्वितीय खंड ‘सृजन पर्व : विचार एवं वैभव का ताना-बाना’ है, जिसमें डॉ. सिंह के सृजनात्मक साहित्य को केन्द्र में रखकर लिखे गए आलोचनात्मक लेखों का संकलन किया गया है। इस पुस्तक के तृतीय खंड ‘भाषा पर्व : अक्षर-अक्षर भेद’ में डॉ. कन्हैया सिंह जी के पाठ-सम्पादन एवं भाषाविज्ञान सम्बन्धी कार्यों पर लिखे गए समीक्षात्मक लेखों को संयोजित किया गया है। ‘संस्कृति पर्व : समष्टि का रचनात्मक उछाह’ जो कि पुस्तक का चतुर्थ खंड है, में डॉ. कन्हैया सिंह जी द्वारा किए गए सूफ़ी साहित्य, सन्त साहित्य तथा इतिहास लेखन विषयक कार्यों की समीक्षा है। पुस्तक का पाँचवाँ और अन्तिम खंड ‘चिट्ठी-विट्ठी : हाल-ए-ज़ुबानी और’ है। इसमें हिन्दी जगत के विभिन्न प्रतिष्ठित साहित्यकारों, समाजसेवियों और प्रमुख राजनेताओं का डॉ. कन्हैया सिंह जी के साथ पत्र-व्यवहार एवं उन पर लिखित आलेख सम्मिलित हैं। साथ ही डॉ. कन्हैया सिंह जी का साक्षत्कार भी इसी खंड में संगृहीत है।

यह पुस्तक हिन्दी के अध्येताओं के लिए हिन्दी पाठानुसन्धान, सूफ़ी साहित्य, सन्त साहित्य, भाषाविज्ञान तथा डॉ. कन्हैया सिंह जी के सम्पूर्ण रचना-संसार को एक साथ समझने में अत्यन्त सहायक सिद्ध होती है।

 

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2020
Edition Year 2021, Ed. 2nd
Pages 511p
Translator Not Selected
Editor Vinamra Sen Singh
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 24.5 X 16 X 3.5
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Editorial Review

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Kanhaiya Singh

Author: Kanhaiya Singh

कन्हैया सिंह

प्रमुख भारतीय साहित्यकार डॉ. कन्हैया सिंह पाठ-सम्पादन एवं सूफ़ी काव्य के अधिकृत विद्वान् के रूप में हिन्दी जगत में सुपरिचित हैं। आजमगढ़ जनपद में जन्मे डॉ. कन्हैया सिंह एम.ए., एल.एल.बी., पीएच.डी., डी.लिट् आदि उपाधियों से विभूषित हैं।

विधि प्रवक्ता के रूप में आपने अपने अध्यापकीय जीवन का प्रारम्भ करते हुए हिन्दी के प्रवक्ता-रीडर अध्यक्ष, प्राचार्य, कार्यकारी अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान, आदि दायित्वों का निर्वहन किया। इनकी चर्चित पुस्तकों में ‘सूफ़ी काव्य : सांस्कृतिक अनुशीलन’, ‘युगद्रष्टा मलिक मुहम्मद जायसी’, ‘सूफ़ीमत’, ‘हिन्दी सूफ़ी काव्य में हिन्दू संस्कृति’, ‘उदार इस्लाम का सूफ़ी चेहरा’, ‘पाठ-सम्पादन के सिद्धान्त’, ‘हिन्दी पाठानुसन्धान’, जायसीकृत ‘पद्मावति : मूल पाठ और टीका', ‘मध्यकालीन अवधी का विकास’, ‘राहुल सांकृत्यायन’, ‘अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध'’ आदि हैं। सृजनात्मक साहित्य के क्षेत्र में महत्त्‍पूर्ण ‘साहित्य और संस्कृति’ (निबन्ध-संग्रह), ‘वेदना के संवाद’ (ललित निबन्ध), ‘अँधेरे के अध्याय’ (संस्मरण), ‘पत्थर की मुस्कान’ (कहानी-संग्रह), ‘दक्षिणांचल दर्शन’ (यात्रा-वृत्तान्त) आदि पुस्तकें हैं। कुल चालीस से अधिक मौलिक पुस्तकें प्रकाशित हैं। इनके साहित्यिक अवदान को देखते हुए इनको उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ का ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय साहित्य सम्मान’ तथा ‘साहित्य भूषण सम्मान’, केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा का ‘सुब्रह्मण्य भारती पुरस्कार’, हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग का ‘साहित्य महोपाध्याय’ आदि पुरस्कारों से विभूषित किया गया है।

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