Islam Ke Dharmik Aayam

Religion
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Islam Ke Dharmik Aayam

इस्लाम के धार्मिक आयाम का समुचित संज्ञान हुसैनी क्रान्ति के परिप्रेक्ष्य में ही

सम्भव है, जिसके नायक इस्लामी पैग़म्बर के सगे नाती हज़रत इमाम हुसैन थे, जिन्होंने सत्य एवं न्याय की प्रतिरक्षा में जिहाद किया और अपने सहयोगियों तथा परिवारजनों सहित कर्बला में शहीद हुए। इमाम हुसैन की शहादत के सर्वव्यापी प्रभाव का अनुमान इससे किया जा सकता है कि हज़रत ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती अजमेरी ने इमाम हुसैन के व्यक्तित्व को ही वास्तविक इस्लाम माना है—“दीन अस्त हुसैन व दीनपनाह अस्त हुसैन।”

हुसैनी क्रान्ति के अनेक आयाम हैं—धार्मिक, सामाजिक, राजनैतिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक आदि। इस महत्त्वपूर्ण विषय पर हिन्दी भाषा में किसी पुस्तक का नितान्त अभाव रहा है। प्रस्तुत ग्रन्थ इस कमी

को पूरा ही नहीं करता, वरन् इस महत्त्वपूर्ण विषय पर यह एक प्रामाणिक दस्तावेज़ है। विद्वान लेखक प्रो. जाफ़र रज़ा ने जिस प्रकार हुसैनी क्रान्ति के उद्देश्यों, घटनाक्रमों एवं निष्कर्षों का वस्तुनिष्ठ एवं निष्पक्ष भाव से विश्लेषण किया है, वह अत्यन्त सराहनीय है। संवेदनशील विषयों पर उनका दृष्टिकोण सन्तुलित, सहज एवं उदार रहा है। जो बात भी कही है, वह ठोस आधार पर प्रामाणिक है। इस्लाम विषयक उनकी विशिष्ट कृतियों के अध्ययन से लगता है कि यही उनका अस्ल मैदान है। इस्लामी इतिहास, धर्म एवं संस्कृति पर उन्हें पूर्ण अधिकार प्राप्त है।

हुसैनी क्रान्ति विषयक पुस्तकों में प्रस्तुत ग्रन्थ शोधपरक वैज्ञानिक दृष्टि के आधार पर अद्वितीय है। उर्दू ही नहीं, फ़ारसी, अरबी या अंग्रेज़ी में भी ऐसी कोई पुस्तक उपलब्ध नहीं है। विश्वास है कि हिन्दी-

जगत् प्रस्तुत ग्रन्थ का स्वागत करेगा।

—प्रो. वहाब अशरफ़ी; 16 फरवरी, 2011

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2011
Edition Year 2011, Ed. 1st
Pages 485p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 2.5
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Editorial Review

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Author: Zafar Raza

जाफ़र रज़ा

प्रख्यात विद्वान्, साहित्यकार एवं चिन्तक प्रोफ़ेसर जाफ़र रज़ा का जन्म 1 दिसम्बर, 1939

को इलाहाबाद में गंगा पार के उतराँव में हुआ। ये स्वतंत्रता सेनानी एवं लेखक स्वर्गीय सैयद खैरात हसन के सुपुत्र हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उर्दू तथा हिन्दी में दो बार ‘डॉक्टर ऑफ़ फ़िलॉसफ़ी' की उपाधियाँ प्राप्त कीं तथा कश्मीर विश्वविद्यालय, श्रीनगर ने प्रकाशित शोधग्रन्थों की मान्यतारूपेण ‘डॉक्टर ऑफ़ लेटर्स' की उपाधि प्रदान की।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के गौरवपात्रिक प्रोफ़ेसर जाफ़र रज़ा 35 वर्षों तक अध्यापन कर प्रेमचन्द पीठाचार्य एवं उर्दू विभागाध्यक्ष पद से सन् 2000 में सेवानिवृत्त हुए।

प्रोफ़ेसर जाफ़र रज़ा का व्यक्तित्व बहुआयामी है। हिन्दी तथा उर्दू भाषाओं एवं साहित्य के अतिरिक्त संस्कृति, इतिहास, दर्शन, इस्लाम धर्म आदि विषयों पर लगभग तीन दर्जन प्रकाशित ग्रन्थ हैं। अनेक बार राष्ट्रीय तथा अन्‍तरराष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत एवं अलंकृत हुए।

इनकी कुछेक महत्त्वपूर्ण हिन्दी पुस्तकों में ‘भारतीय इस्लामी संस्कृति’, ‘इस्लाम का सैद्धान्तिक परिवेश’, ‘इस्लाम के धार्मिक आयाम : हुसैनी क्रान्ति के परिप्रेक्ष्य में’, ‘भारतीय साहित्य में मुसलमानों का अवदान’, ‘कथाकार प्रेमचन्द’, ‘प्रेमचन्द : कहानी का रहनुमा’, ‘उर्दू शायरी : आज़ादी के बाद’, ‘हिन्दी-उर्दू शब्दकोश’ आदि उल्लेखनीय हैं।

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