Sufiwad Ke Adhyatmik Ayam

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Sufiwad Ke Adhyatmik Ayam
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हिन्दी में तसव्वु़फ या सूफ़ीमत पर दो प्रामाणिक पुस्तकें छपी हैं। एक चन्द्रबली पाण्डेय की, दूसरी डॉ. राममूर्ति त्रिपाठी की। इस्लाम धर्म के अनुयायी विद्वान् की हिन्दी में यह पहली पुस्तक है—सू़फ़ीवाद के आध्यामिक आयाम।

इस पुस्तक में ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के साथ-साथ सू़फ़ी सिद्धान्तों का बहुत ही स्पष्ट और प्रामाणिक विवेचन है। प्रोफ़ेसर जाफ़र रज़ा ने अपने प्रतिपादन की पुष्टि क़ुर्आन के उद्धरणों से की है। इसके साथ-साथ विभिन्न सू़फ़ी सम्प्रदायों का ऐतिहासिक, दार्शनिक और साधनापरक विवेचन भी इसमें है।

इस पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पूर्ववर्ती मूल अरबी-फ़ारसी विवेचकों का संक्षिप्त परिचय भी दिया गया है। विशेष रूप से भारत में प्रसिद्ध सू़फ़ी-फ़कीर सम्प्रदायों और उनके प्रमुख हस्ताक्षरों के बारे में बहुत ही प्रामाणिक विवेचन है। प्रोफ़ेसर जाफ़र ऱजा ने अत्यन्त निष्पक्ष होकर सूफ़ीवाद का एक प्रामाणिक दस्तावेज़ प्रस्तुत किया है।

सूफ़ी-दर्शन इस्लाम को मथ करके निकला मक्खन है। यह इस्लाम को प्रतिष्ठा दिलाने में तो सफल हुआ ही है, इसकी पृष्ठभूमि का दिग्दर्शन प्रोफ़ेसर जाफ़र ऱजा ने अच्छी तरह प्रस्तुत किया है।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2014
Edition Year 2014, Ed. 1st
Pages 168p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1
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Editorial Review

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Author: Zafar Raza

जाफ़र रज़ा

प्रख्यात विद्वान्, साहित्यकार एवं चिन्तक प्रोफ़ेसर जाफ़र रज़ा का जन्म 1 दिसम्बर, 1939

को इलाहाबाद में गंगा पार के उतराँव में हुआ। ये स्वतंत्रता सेनानी एवं लेखक स्वर्गीय सैयद खैरात हसन के सुपुत्र हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उर्दू तथा हिन्दी में दो बार ‘डॉक्टर ऑफ़ फ़िलॉसफ़ी' की उपाधियाँ प्राप्त कीं तथा कश्मीर विश्वविद्यालय, श्रीनगर ने प्रकाशित शोधग्रन्थों की मान्यतारूपेण ‘डॉक्टर ऑफ़ लेटर्स' की उपाधि प्रदान की।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के गौरवपात्रिक प्रोफ़ेसर जाफ़र रज़ा 35 वर्षों तक अध्यापन कर प्रेमचन्द पीठाचार्य एवं उर्दू विभागाध्यक्ष पद से सन् 2000 में सेवानिवृत्त हुए।

प्रोफ़ेसर जाफ़र रज़ा का व्यक्तित्व बहुआयामी है। हिन्दी तथा उर्दू भाषाओं एवं साहित्य के अतिरिक्त संस्कृति, इतिहास, दर्शन, इस्लाम धर्म आदि विषयों पर लगभग तीन दर्जन प्रकाशित ग्रन्थ हैं। अनेक बार राष्ट्रीय तथा अन्‍तरराष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत एवं अलंकृत हुए।

इनकी कुछेक महत्त्वपूर्ण हिन्दी पुस्तकों में ‘भारतीय इस्लामी संस्कृति’, ‘इस्लाम का सैद्धान्तिक परिवेश’, ‘इस्लाम के धार्मिक आयाम : हुसैनी क्रान्ति के परिप्रेक्ष्य में’, ‘भारतीय साहित्य में मुसलमानों का अवदान’, ‘कथाकार प्रेमचन्द’, ‘प्रेमचन्द : कहानी का रहनुमा’, ‘उर्दू शायरी : आज़ादी के बाद’, ‘हिन्दी-उर्दू शब्दकोश’ आदि उल्लेखनीय हैं।

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