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Dattatreyagita

Edition: 2025, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Radhakrishna Prakashan
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Dattatreyagita

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तत्त्वं क्षेत्रं व्योमातीतमहं क्षेत्रज्ञ उच्यते।

  अहं कर्ता च भोक्ता च जीवन्मुक्तः स उच्यते॥

तत्त्व (सत्य) क्षेत्र (देह) से परे होता है और उसे क्षेत्रज्ञ (आत्मा) कहा जाता है। मैं कर्ता (क्रिया करनेवाला) और भोक्ता (भोग करनेवाला) हूँ। जो इस सत्य को जानता है, वही सच्चा जीवन्मुक्त कहलाता है। 

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 112p
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1
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Author: Ashok Kumar Sharma

अशोक कुमार शर्मा

अशोक कुमार शर्मा अनेक भाषाओं में प्रकाशित 63 चर्चित पुस्तकें। सात राष्ट्रीय और 19 राज्य स्तरीय पुरस्कार। एम.एससी., एम.ए. (हिन्दी साहित्य), पीजीजेएमसी (जनसंचार एवं पत्रकारिता), तथा पीएच.डी. (आधुनिक पत्रकारिता)। देश के प्रमुख मीडिया घरानों में वरिष्ठ पदों पर कार्य। अनेक मुख्यमंत्रियों के विशेष कार्याधिकारी रहे। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में ‘महाकुम्भ–2010’ तथा 2013 के मुख्य जनसम्‍पर्क एवं मीडिया प्रभारी। उत्तर प्रदेश सरकार में संयुक्त निदेशक-पद से सेवानिवृत्त। टाइम्स ऑफ इंडिया समूह के पूर्व एडवाइजर (स्किलिंग)। सम्प्रति : केन्‍द्र तथा अनेक राज्य सरकारों के विभिन्न प्रशासनिक, पुलिस, पैरामिलेट्री तथा विभागीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अतिथि विशेषज्ञ।          

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