भारत के आदिवासी समाज और उसके जीवन पर महाश्वेता देवी ने प्रामाणिक कथासाहित्य का निर्माण किया है।
‘चोट्टि मुण्डा और उसका तीर’ इसी शृंखला की एक कड़ी है, जो इस उपन्यास के नायक चोट्टि मुण्डा (चोट्टि एक नदी का भी नाम है) के संघर्षमय जीवन के माध्यम से मुण्डा जाति के शोषण, उत्पीड़न और उसके ख़िलाफ़ उसके तेजस्वी और वीरत्वपूर्ण संघर्ष की कहानी कहती है।
मुण्डा जाति ने अंग्रेज़ों के शासनकाल में बिरसा मुण्डा के नेतृत्व में गौरवशाली विद्रोह किया था, जिसे अन्ततः दबा दिया गया। शोषण, उत्पीड़न बदस्तूर जारी रहा, जो आज़ादी के बाद भी बरकरार रहा। आदिवासी कल्याण की परिकल्पनाएँ कितनी थोथी और पाखंडपूर्ण हैं, यह भी इस उपन्यास में पूरी तरह स्पष्ट होता है।
चोट्टि मुण्डा की कहानी मुण्डारी जाति और दूसरी अस्पृश्य हिन्दू जातियों के विद्रोह की अपूर्व तथा शौर्यमय गाथा है, जो हमारे देश के वर्तमान ‘सच’ को उजागर करती है।
| Language | Hindi |
|---|---|
| Binding | Hard Back |
| Translator | Not Selected |
| Editor | Not Selected |
| Publication Year | 1981 |
| Edition Year | 2018, Ed. 4th |
| Pages | 319p |
| Price | ₹750.00 |
| Publisher | Radhakrishna Prakashan |
| Dimensions | 22 X 14.5 X 2.5 |