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Bansava Phoole Ujiyaar

Author: Soni Pandey
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Lokbharti Prakashan
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Bansava Phoole Ujiyaar

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‘बँसवा फूले उजियार’ एक सपने की जिन्दा तफसील है। यहाँ आपको स्त्री सशक्तता की जमीनी हकीकत मिलेगी, जिसमें गाँव और कस्बाई समाज की स्त्री अवहेलना और दमन की कहानियाँ हैं। उपन्यास में मौजूद स्त्रियों की चेतना संघर्ष की राह चल हाशिए के समाज का दम-खम बनकर निखर गई है। सामाजिक बेहतरी के राजनीतिक आर्थिक फार्मूलों में छिपी सत्ताओं की नीयत के मुकाबले खड़ी हुई स्त्रियों में तारा है, ज्योति है, एक कामयाब झलक में राजकुमारी भी है। इन स्त्रियों के साहस का पक्ष बनकर खड़ा होने वाला समाज बेशक नहीं है, क्योंकि कोई भी दुनिया सहसा नहीं बदलती मगर धीरे-धीरे ही सही अपने नाभिक में वह परिवर्तन की आग जलाए रखती है। लेखिका ने बाँसफोड़ जैसी तिरस्कृत जाति के हुनर से जुड़कर एक सर्वव्यापी रूपान्तरण की हाइपोथीसिस को बड़े एहतियात से प्रस्तुत किया है। कथा में बदले हुए पुरुष भी हैं, इसलिए मुक्ति कभी अकेले में नहीं मिलती जैसे मुक्तिबोधीय निष्कर्ष की भी दखल यहाँ है और है अछूती प्रकृति की सुन्दरता का विस्तार जिससे जुड़कर फूले हुए बाँस नई और आज़ाद दुनिया का रूपक बन जाते हैं।

इस कथा के मार्मिक पहलू असरदार हैं। जीवन्त सुखान्त की कथा है यह।

—चन्द्रकला त्रिपाठी

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 160p
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 19.5 X 13 X 1
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Soni Pandey

Author: Soni Pandey

सोनी पांडेय

सोनी पांडेय का जन्म 12 जुलाई, 1975 को उत्तर प्रदेश के जनपद मऊनाथ भंजन में हुआ। पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर से हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर के बाद ‘निराला का कथा साहित्य : कथ्य और शिल्प’ विषय पर पी-एच.डी., बी.एड. और कथक डांस जूनियर डिप्लोमा भी किया।

उनकी प्रकाशित पुस्तकें हैं—‘सुनो कबीर’ (उपन्यास); ‘बलमा जी का स्टूडियो’, ‘मोहपाश’, ‘मितरा कब मिलोगे’ (कहानी-संग्रह);

‘मन की खुलती गिरहें’, ‘आखिरी प्रेम-पत्र’, ‘तीसरी बेटी का हलफनामा एवं सोनी पांडेय की अन्य लम्बी कविताएँ’, ‘अंतहीन यात्रा के सहयात्री’ (कविता-संग्रह); ‘निराला का कथा साहित्य : वस्तु और शिल्प’ (आलोचना); ‘उषाकिरण खान का कथा लोक’, ‘खुशरंग लिफ़ाफ़ों में बचपन की चिट्ठियाँ’, ‘और अंत से बाहर : स्त्री कथा का वृहत्तर संसार, उर्मिला शिरीष’ (सम्पादन)। कई कहानियों और कविताओं का बांग्ला, मराठी, अंग्रेजी, उर्दू एवं नेपाली आदि भाषाओं में अनुवाद।

उन्हें ‘शीला सिद्धान्तकर सम्मान’, ‘अन्तराष्ट्रीय सेतु कविता सम्मान’, ‘माँ धनपती देवी कथा सम्मान’, ‘संकल्प साहित्य सर्जना सम्मान’, ‘यशपाल कथा सम्मान’, ‘पहल सविता कथा सम्मान’ तथा ‘वैली ऑफ वर्ड्‍स पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है।

सम्प्रति : हिन्दी त्रैमासिक पत्रिका ‘गाथान्तर’ का सम्पादन।

ई-मेल : [email protected]

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