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Cut To Dilli Aur Anya Kahaniyan

Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Radhakrishna Prakashan
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Cut To Dilli Aur Anya Kahaniyan

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समकालीन पीढ़ी के चुनिन्दा लेखकों में से एक उमा शंकर चौधरी का ‘अयोध्या बाबू सनक गए हैं’ के बाद यह दूसरा कहानी-संग्रह है। उनकी कहानियाँ अपने समय की विसंगतियों का काला चिट्ठा हैं। ये कहानियाँ धुर गाँव से लेकर शहर तक का सफर करती हैं और इस सफर में अपने समय के उन अनछुए पहलुओं पर विचार करती हैं जिन पर हमारी निगाह बहुत आसानी से नहीं जा पाती है। भूमंडलीकरण के बाद के भारत की तसवीर कैसी बदली है और उसकी चमक में अँधेरा कहाँ-कहाँ फैला है, उमा शंकर अपनी कहानियों में इसे दिखाने की पूरी कोशिश करते हैं। इनके पात्र हाशिये पर पड़े हुए वे लोग हैं जिन्हें इस बाजारवादी संस्कृति में सिर्फ इसलिए भुला दिया गया है क्योंकि वे इस लोकतंत्र में एक वोट तो हैं लेकिन उपभोक्ता में तब्दील नहीं हो पाए हैं।

उमा शंकर चौधरी ने अपने लेखन में भाषा और शिल्प के साथ-साथ विषय के स्तर पर भी खूब प्रयोग किये हैं। यही कारण है कि ‘ललमुनियाँ मक्खी...’ कहानी में एक मक्खी कहानी की पात्र बनती है तो वहीं दूसरी ओर ‘कट टू दिल्ली...’ में प्रधानमंत्री का प्रवेश होता है और इस समाज का एक विद्रूप सच हमारे सामने आ जाता है। ‘कट टू दिल्ली...’, ‘मिसेज वाटसन की भुतहा कोठी’, ‘ललमुनियाँ मक्खी...’ जैसी कहानियाँ कहानी की दुनिया में विषय के स्तर पर किये गए प्रयोग के नायाब उदाहरण हैं।

उमा शंकर चौधरी का यह संग्रह अपनी पीढ़ी और अपने समय में एक विश्वसनीय उपस्थिति दर्ज करने वाला है।

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 192p
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 20 X 13 X 1.5
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Uma Shankar Choudhary

Author: Uma Shankar Choudhary

उमा शंकर चौधरी               

चर्चित लेखक उमा शंकर चौधरी कविताएँ और कथा में समान रूप से लेखन कर रहे हैं। अभी तक तीन कविता-संग्रह हैं— ‘कहते हैं तब शहंशाह सो रहे थे’, ‘वे तुमसे पूछेंगे डर का रंग’ और ‘चूँकि सवाल कभी ख़त्म नहीं होते’; दो कहानी-संग्रह—‘अयोध्या बाबू सनक गए हैं’ और ‘कट टु दिल्ली और अन्य कहानियाँ’। यह तीसरा कहानी-संग्रह—‘दिल्ली में नींद’; उपन्यास—‘अँधेरा कोना’। आलोचना की भी दो-तीन पुस्तकें हैं। कविताओं, कहानियों का विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। कविता-संग्रह ‘कहते हैं तब शहंशाह सो रहे थे’ का मराठी अनुवाद साहित्य अकादेमी से ‘म्हणे तव्हा राजाधिराज झोपेत होते’ शीर्षक से प्रकाशित है। कुछ कविताएँ भारत के अलग-अलग विश्वविद्यालयों के स्नातक-स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों का हिस्सा हैं। कहानियों और कविताओं पर कई विश्वविद्यालयों में शोध हुए और हो रहे हैं। हिन्दी कहानी के कई चुनिन्दा संकलनों में कहानियाँ शामिल हैं। साथ ही कई कहानियों का विभिन्न शहरों में नाट्य-मंचन भी हो चुका है।

‘साहित्य अकादेमी युवा सम्मान’, ‘भारतीय ज्ञानपीठ नवलेखन सम्मान’, ‘रमाकांत स्मृति कहानी पुरस्कार’ और ‘अंकुर मिश्र स्मृति कविता पुरस्कार’ जैसे महत्त्वपूर्ण सम्मानों से सम्मानित हैं।

सम्प्रति : दिल्ली विश्वविद्यालय के एक महाविद्यालय में अध्यापनरत हैं। 

 

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