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Char Din Ki Jawani Teri-Hard Cover

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तेजी से सिकुड़ती इस दुनिया में पिछड़ा भारत ‘नएपन’ के ओले सह रहा है। नयापन का दायरा तकनीक, पद्धति, वस्तु से लेकर विचार तक फैला है। नए वाद के आगमन के साथ पुराने वादों के अन्त की घोषणाओं में कथा के अन्त की घोषणा शामिल है। साहित्य अकबकाया दीखता है।

लेकिन इस संकलन की कहानियाँ अपनी ज़मीन में जड़ों को पसारती, तने को ठसके से खड़ा रखे हुए दीखती हैं क्योंकि उन्हें भरोसा है अपनी कथा में सिक्त पूर्वी तर्ज का। उनमें पहाड़ का दरकता जीवन अपने रूढ़ विश्वासों और गतिशीलता, दोनों के साथ दीखता है। कहानियों में जीवन की स्थितियाँ और चरित्र दोनों महत्त्व पाते हैं। इनमें हिर्दा मेयो जैसा अनूठा चरित्र भी है। उसकी हँसी में ऐसा रुदन छिपा है जो सीधे पहाड़ की दरकती छाती से फूटता रहता है, फिर भी अपनी अस्मिता पहाड़ में ही तलाशता है। मंत्र से बवासीर ठीक कर लेने का भ्रम पालने वाले हरूचा के साथ विदेश में जा बसे मुन्‍नू चा जैसे चरित्र भी हैं। विकास के नाम पर पहाड़ की संजीवनी सोख लेनेवाली शक्तियाँ हैं। प्रकृति के आदिम प्रजनन कृषि पर पड़ती परायी छाया की दारुण कथा ‘बीज’ में है। जहाँ हिर्दा मेयो में पहाड़ का धीरज है, वहीं उसके मंझले बेटे में पहाड़ का ग़ुस्सा भी है।

इन कहानियों में आत्मविश्वास से भरा खुलापन है जो परम्परा की मिट्टी पर प्रयोग करता चलता है।

कथा-रस से भरपूर इन कहानियों में विवरण की भव्यता के साथ-साथ चरित्र-चित्रण की विरल कुशलता भी लक्षित होती है। भाषा में लचीलापन के साथ कविता-सी ख़ुशबू भी है। परम्परा के संग चलती प्रयोगशीलता भी है। देशज मिट्टी से फूटी आधुनिकता प्रयोग के लिए परायों का मुँह नहीं जोहती, बल्कि स्वयं नया रूप रचती है।

यह मृणाल पाण्डे का चौथा संकलन है जो नया तो है ही, प्रौढ़ भी है। इसीलिए इसकी रचनात्मकता की प्रतिध्वनियाँ भविष्य में भी सुनी जाएँगी।

— अरुण प्रकाश

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Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 1995
Edition Year 2024, Ed. 6th
Pages 108p
Price ₹395.00
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 18.5 X 12.5 X 1.5
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Mrinal Pande

Author: Mrinal Pande

मृणाल पाण्डे

मृणाल पाण्डे का जन्म 26 फरवरी, 1946 को मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ में हुआ। उन्होंने प्रयाग विश्वविद्यालय, इलाहाबाद से अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. किया। गन्धर्व महाविद्यालय से संगीत विशारद तथा कॉरकोरन स्कूल ऑफ आर्ट, वाशिंगटन से चित्रकला एवं डिजाइन का विधिवत अध्ययन किया। कई वर्षों तक विभिन्न विश्वविद्यालयों में अध्यापन के बाद पत्रकारिता के क्षेत्र में आईं। ‘साप्ताहिक हिन्दुस्तान’, ‘वामा’ तथा ‘दैनिक हिन्दुस्तान’ में समय-समय पर बतौर सम्पादक कार्य किया। स्टार न्यूज और दूरदर्शन के लिए हिन्दी समाचार बुलेटिन का सम्पादन किया। ‘दैनिक हिन्दुस्तान’, ‘कादम्बिनी’ एवं ‘नन्दन’ की प्रधान सम्पादक रहीं। प्रसार भारती की चेयरमैन भी रहीं। फिलहाल ‘नेशनल हेरल्ड समूह’ की वरिष्ठ सलाहकार हैं।

उनकी प्रमुख पुस्तकें हैं—‘सहेला रे’, ‘विरुद्ध’, ‘पटरंगपुर पुराण’, ‘देवी’, ‘हमका दियो परदेस’, ‘अपनी गवाही’ (उपन्यास); ‘दरम्यान’, ‘शब्दवेधी’, ‘एक नीच ट्रैजिडी’, ‘एक स्त्री का विदागीत’, ‘यानी कि एक बात थी’, ‘बचुली चौकीदारिन की कढ़ी’, ‘चार दिन की जवानी तेरी’, ‘माया ने घुमायो’, (कहानी-संग्रह); ‘ध्वनियों के आलोक में स्त्री’ (संगीत); ‘मौजूदा हालात को देखते हुए’, ‘जो राम रचि राखा’, ‘आदमी जो मछुआरा नहीं था’, ‘चोर निकल के भागा’, ‘सम्पूर्ण नाटक’ और देवकीनन्दन खत्री के उपन्यास ‘काजर की कोठरी’ का इसी नाम से नाट्य-रूपान्तरण (नाटक); ‘स्त्री : देह की राजनीति से देश की राजनीति तक’, ‘स्त्री : लम्बा सफर’, ‘जहाँ औरतें गढ़ी जाती हैं’ (निबन्ध); ‘बन्द गलियों के विरुद्ध’ (सम्पादन); ‘ओ उब्बीरी’ (स्वास्थ्य); मराठी की अमर कृति ‘मांझा प्रवास : उन्नीसवीं सदी’ तथा अमृतलाल नागर की हिन्दी कृति ‘गदर के फूल’ का अंग्रेजी में अनुवाद। अंग्रेजी—‘द सब्जेक्ट इज वूमन’ (महिला-विषयक लेखों का संकलन); ‘द डॉटर्स डॉटर’, ‘माई ओन विटनेस’ (उपन्यास); ‘देवी’ (उपन्यास-रिपोर्ताज); ‘स्टेपिंग आउट : लाइफ एंड सेक्सुअलिटी इन रूरल इंडिया’।

ई-मेल : [email protected]

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