Facebook Pixel

Aalhkatha : Veergatha Ka Aatmahanta Adhyay

Author: Mahesh Katare
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
As low as ₹299.25 Regular Price ₹399.00
25% Off
In stock
SKU
Aalhkatha : Veergatha Ka Aatmahanta Adhyay

- +
Share:
Codicon

आल्हकथा : वीरगाथा का आत्महन्ता अध्याय लोक में प्रचलित महाकाव्य आल्हखंड की कथा है। कवि जगनिक भट्ट के ‘परमाल रासो’ से निसृत इस गाथा में श्रोता-समुदाय की असाधारण रुचि, काव्य की मौखिक परम्पराओं और जन-कवियों की स्थानीय रचनाध‌र्मिता का योग भी रहा, और इस सबके चलते कम-से-कम उत्तर भारत में रामायण और महाभारत के बाद जिस काव्य ने लोक में अपनी जगह बनाई, वह आल्हा-ऊदल की कथा ही है।

यह उपन्यास इतिहास और लोक-स्मृतियों को आधार बनाकर महोबा के महान योद्धाओं आल्हा-ऊदल और उनके ऐतिहासिक व सामाजिक-सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य को एक रचनात्मक आकार देने का प्रयास करता है।

वरिष्ठ कथाकार महेश कटारे ने अपने पूर्व के उपन्यासों में भी कई ऐसे विषयों और चरित्रों को अपने कुशल कथा-वितान के ज़रिये जीवन्त किया है जिनकी ओर अक्सर कथाकारों का ध्यान नहीं गया था। ‘आल्हकथा’ में उन्होंने आल्हा-ऊदल के समय की विसंगतियों को चित्रित क​रते हुए उन सरोकारों को भी रेखांकित किया है जिनका सम्बन्ध हर युग के सामाजिक-राजनीतिक जीवन-व्यापार से होता है।

लीक से हटकर लिखे गए उपन्यासों को पसन्द करने वाले पाठक इस कृति को निश्चय ही संग्रहणीय पाएँगे।

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 256p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1.5
Write Your Own Review
You're reviewing:Aalhkatha : Veergatha Ka Aatmahanta Adhyay
Your Rating
Mahesh Katare

Author: Mahesh Katare

महेश कटारे

महेश कटारे का जन्म 14 दिसम्बर, 1946 को बिल्हैटी, ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में हुआ। आजीविका के लिए खेती की, फिर कुछ साल स्कूल में पढ़ाया।

उनकी प्रकाशित रचनाएँ हैं—‘कामिनी काय कान्तारे’ (दो खंड), ‘भर्तृहरि : काया के वन में’ (‘कामिनी काय कान्तारे’ का नया रूप), ‘भवभूति कथा’, ‘कालीधार’ (उपन्यास); ‘समर शेष है’, ‘इतिकथा अथकथा’, ‘मुर्दा स्थगित’, ‘पहरुआ’, ‘छछिया भर छाछ’, ‘सात पान की हमेल’, ‘देहात’, ‘फागुन की मौत’, ‘मेरी प्रिय कथाएँ’, ‘ग़ौरतलब कहानियाँ’ (कहानी-संग्रह); ‘महासमर

का साक्षी’, ‘अँधेरे युगांत के’, ‘विभाजन’ (कथानाट्य); ‘हे राम’, ‘गाँव-गाथा’ (नाटक); ‘पहियों पर रात-दिन’, ‘देस बिदेस दरवेश’

(यात्रा-वृत्तान्त); ‘नज़र इधर-उधर’, ‘समय के साथ-साथ’ (अन्य)। उन्होंने ‘वसुधा’ पत्र‌िका के कहानी विशेषांक का सम्पादन भी किया है। उनकी कहानी ‘पहियों पर चढ़े सुख’ पर लघु फ़िल्म बनी और इसका नाट्य मंचन हुआ है। विभिन्न भारतीय भाषाओं में उनकी रचनाओं के अनुवाद और मंचन हुए हैं।

उन्हें ‘वागीश्वरी सम्मान’, म. प्र. साहित्य परिषद/म. प्र. साहित्य अकादमी के ‘कथा पुरस्कार’, ‘प्रेमचन्द कथा पुरस्कार’, ‘शमशेर सम्मान’, ‘कथाक्रम सम्मान’, ‘राष्ट्रभाषा परिषद बिहार सम्मान’, ‘ढींगरा फ़ाउंडेशन कथा-सम्मान’, ‘कुसुमांजलि सम्मान’, ‘श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको सम्मान’, ‘स्पंदन कथा शिखर सम्मान’ और ‘रज़ा फ़ाउंडेशन फ़ेलोशिप’ सहित कई पुरस्कार और सम्मान प्रदान किये जा चुके हैं।

ई-मेल : [email protected] 

Read More
Books by this Author
New Releases
Back to Top