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Mahabharat : Mahakavya Evam Rashtra

Author: G.N. Devy
Translator: Hari Pratap Tripathi
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Mahabharat : Mahakavya Evam Rashtra

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‘महाभारत’ ने अपनी शुरुआत से ही इस उपमहाद्वीप में लाखों लोगों के जीवन पर गहरा प्रभाव डाला है। भारत में, अनेक राजवंश आए और चले गए; धार्मिक सम्प्रदाय बने और मिट गए; दर्शन के विभिन्न मत आए और फिर उनकी जगह दूसरों ने ले ली, इसी तरह अनेक कला रूप भी एक समय पर चमकने के बाद अन्य कला-शैलियों के सामने मन्द पड़ गए—लेकिन ‘महाभारत’ हमेशा भारतीय कल्पना को रोमांचित करता रहा।

महाभारत की व्याख्याओं और टीकाओं की संख्या विस्मयकारी है। आख़िर वह कौन-सी चीज़ है जो महाभारत को ऐसा कालजयी जादू प्रदान करती है? क्या इसके वे पौराणिक पात्र जो इस महाकाव्य को इतना मनमोहक बनाते हैं? या फिर इसमें निहित दार्शनिक और आध्यात्मिक विचार जो पाठकों को चमत्कृत कर देते हैं? या फिर ये सब तत्त्व मिलकर कुछ ऐसा प्रभाव पैदा करते हैं कि दुनिया-भर के विद्वान और पाठक इसकी तरफ़ खिंचे चले आते हैं? और अन्ततः वह क्या है जिसके चलते पीढ़ियों से लाखों भारतीयों के अवचेतन मन पर इस महाकाव्य की ऐसी अविश्वसनीय पकड़ क़ायम है?

मराठी, कन्नड़, असमिया, तमिल, उर्दू, गुजराती, बांग्ला और मलयालम सहित अनेक भाषाओं में अनूदित, जी. एन. देवी की यह पुस्तक महाभारत से जुड़े ऐसे ही सवालों का जवाब देती है—और यह भी बताती है कि क्यों यह महाकाव्य भारत के राष्ट्रीय महाकाव्यों में एक विशेष स्थान पर आज भी बना हुआ है?

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Hari Pratap Tripathi
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 176p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 20 X 13 X 1
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G.N. Devy

Author: G.N. Devy

जी. एन. देवी

बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय और धीरूभाई अम्बानी इंस्टीट्यूट ऑफ़ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में अंग्रेज़ी के पूर्व प्रोफ़ेसर जी. एन. देवी अंग्रेज़ी, मराठी और गुजराती में लिखते हैं। वे बड़ौदा स्थित भाषा रिसर्च सेंटर और तेजगढ़ की आदिवासी अकादमी के संस्थापक हैं। उन्होंने भारत के आदिवासी तथा घुमन्तू समुदायों के साथ व्यापक रूप से काम किया है। पीपुल्स लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ़ इंडिया (PLSI) का नेतृत्व किया है, जो पचास खंडों में भारत की सभी जीवित भाषाओं का एक व्यापक दस्तावेज़ीकरण है।

उनकी प्रसिद्ध कृतियों में ‘After Amnesia’, ‘Of Many Heroes’, ‘Painted Words’, ‘Nomad Called Thief’, ‘Vanaprastha’ (मराठी में) और ‘आदिवासी जाने छे’ (गुजराती में) शामिल हैं। उन्होंने स्वदेशी संस्कृतियों और ज्ञान पर छह खंडों की एक शृंखला का सह-सम्पादन भी किया है।

एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने विमुक्त और घुमन्तू जनजातियों के अधिकारों के आन्दोलन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई और लेखकों और कलाकारों के दक्षिणायन आन्दोलन की शुरुआत की है। वर्तमान में धारवाड़ में रहते हैं। उन्हें उनके लेखन के साथ-साथ सामाजिक कार्यों के लिए भी कई पुरस्कार मिले हैं, जिनमें ‘पद्मश्री’, ‘प्रिंस क्लॉस पुरस्कार’ और ‘लिंगुआपैक्स पुरस्कार’ शामिल हैं।

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