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Mahesh Katare

Mahesh Katare

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महेश कटारे

महेश कटारे का जन्म 14 दिसम्बर, 1946 को बिल्हैटी, ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में हुआ। आजीविका के लिए खेती की, फिर कुछ साल स्कूल में पढ़ाया।

उनकी प्रकाशित रचनाएँ हैं—‘कामिनी काय कान्तारे’ (दो खंड), ‘भर्तृहरि : काया के वन में’ (‘कामिनी काय कान्तारे’ का नया रूप), ‘भवभूति कथा’, ‘कालीधार’ (उपन्यास); ‘समर शेष है’, ‘इतिकथा अथकथा’, ‘मुर्दा स्थगित’, ‘पहरुआ’, ‘छछिया भर छाछ’, ‘सात पान की हमेल’, ‘देहात’, ‘फागुन की मौत’, ‘मेरी प्रिय कथाएँ’, ‘ग़ौरतलब कहानियाँ’ (कहानी-संग्रह); ‘महासमर

का साक्षी’, ‘अँधेरे युगांत के’, ‘विभाजन’ (कथानाट्य); ‘हे राम’, ‘गाँव-गाथा’ (नाटक); ‘पहियों पर रात-दिन’, ‘देस बिदेस दरवेश’

(यात्रा-वृत्तान्त); ‘नज़र इधर-उधर’, ‘समय के साथ-साथ’ (अन्य)। उन्होंने ‘वसुधा’ पत्र‌िका के कहानी विशेषांक का सम्पादन भी किया है। उनकी कहानी ‘पहियों पर चढ़े सुख’ पर लघु फ़िल्म बनी और इसका नाट्य मंचन हुआ है। विभिन्न भारतीय भाषाओं में उनकी रचनाओं के अनुवाद और मंचन हुए हैं।

उन्हें ‘वागीश्वरी सम्मान’, म. प्र. साहित्य परिषद/म. प्र. साहित्य अकादमी के ‘कथा पुरस्कार’, ‘प्रेमचन्द कथा पुरस्कार’, ‘शमशेर सम्मान’, ‘कथाक्रम सम्मान’, ‘राष्ट्रभाषा परिषद बिहार सम्मान’, ‘ढींगरा फ़ाउंडेशन कथा-सम्मान’, ‘कुसुमांजलि सम्मान’, ‘श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको सम्मान’, ‘स्पंदन कथा शिखर सम्मान’ और ‘रज़ा फ़ाउंडेशन फ़ेलोशिप’ सहित कई पुरस्कार और सम्मान प्रदान किये जा चुके हैं।

ई-मेल : [email protected] 

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