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Yuddh Aur Shanti (1-4)

Author: Leo Tolstoy
Translator: Madan Lal Madhu
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
As low as ₹1,124.25 Regular Price ₹1,499.00
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Yuddh Aur Shanti (1-4)

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‘युद्ध और शान्ति’ को अनेक विद्वानों ने दुनिया का सर्वश्रेष्ठ उपन्यास माना है। इसमें तोल्स्तोय ने नेपोलियन के रूस पर आक्रमण को आधार बनाकर रूसी जनजीवन का महाकाव्य रचा है। नेपोलियन का आक्रमण न सिर्फ शासक और सैनिकों को आलोड़ित करता है बल्कि किसानों, अभिजातों, सामान्य नागरिकों आदि विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों को उनके इतिहास, वर्तमान और संस्कृति की समस्याओं के सामने खड़ा कर देता है। युद्ध के बहाने तोल्स्तोय एक ऐसी त्रासदी को रेखांकित करते हैं जो किसी एक देश अथवा समाज की नहीं बल्कि पूरी मानवजाति की समस्या है।

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Madan Lal Madhu
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 1690p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 2.5
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Leo Tolstoy

Author: Leo Tolstoy

लेव तोल्स्तोय

जन्म : 9 सितम्बर (पुराने कैलेंडर के हिसाब से 28 अगस्त), 1828; रूसी साम्राज्य के तूला प्रान्त की यास्नाया पोल्याना जागीर में।

आधुनिक इतिहास में यदि किसी विचारक-लेखक की ख्याति उसकी ज़िन्दगी में ही पूरी दुनिया में फैल चुकी थी और जीते-जी ही यदि वह एक मिथक बन गया था, तो वे निस्सन्देह लेव तोल्स्तोय ही थे।

उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध के साहित्यिक परि:दृश्य पर जिस तरह बाल्ज़ाक छाए हुए थे, उसी तरह उत्तरार्द्ध के साहित्यिक परि:दृश्य पर तोल्स्तोय का प्रभाव-साम्राज्य फैला हुआ था।

आम तौर पर, तोल्स्तोय को उनके दो वृहद् और महान उपन्यासों—‘युद्ध और शान्ति’ तथा ‘आन्ना कारेनिना’ के लिए जाना जाता है। इनकी गणना निर्विवाद रूप से, अब तक लिखे गए दुनिया के सर्वोत्कृष्ट उपन्यासों में की जाती है। कुछ लोग उनके तीसरे प्रसिद्ध उपन्यास ‘पुनरुत्थान’ को भी इसी कोटि में शामिल करते हैं। उनकी एक और चर्चित कृति ‘इवान इलिच की मौत’ की गणना उपन्यासिका के सर्वश्रेष्ठ उदाहरणों में की जाती है।

अपने अन्तिम तीस वर्षों के दौरान एक धार्मिक और नैतिक शिक्षक के रूप में उन्हें विश्वस्तरीय ख्याति मिली। बुराई का प्रतिरोध न करने के उनके सिद्धान्त का गाँधी पर भी महत्त्वपूर्ण प्रभाव पड़ा था। दुनिया आज तोल्स्तोय की धार्मिक मान्यताओं को भुला चुकी है, लेकिन साहित्यकार तोल्स्तोय की ख्याति आज भी अक्षुण्ण है और विश्व-साहित्य की क्लासिकी सम्पदा में अद्वितीय अभिवृद्धि करनेवाले महान साहित्य-सर्जक के रूप में उन्हें शताब्दियों बाद ही नहीं, बल्कि सहस्राब्दियों बाद भी याद किया जाएगा।

निधन : 20 नवम्बर (पुराने कैलेंडर के अनुसार, 7 नवम्बर) 1910; अस्तापोवो, रूस।

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