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Vivekanand

Author: Romain Rolland
Translator:
Edition: 2024, Ed. 5th
Language: Hindi
Publisher: Lokbharti Prakashan
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Vivekanand

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महान् भारतीय सन्त एवं चिन्तक रामकृष्ण का आध्यात्मिक ज्ञान ग्रहण करके उनके चिन्तन के बीज-कणों को सारे संसार में वितरित करने और अपना कार्य सफलतापूर्वक सम्पादित करनेवाले विवेकानन्द का जीवन निश्चय ही अत्यन्त गौरवपूर्ण एवं प्रेरणादायक है। विवेकानन्द ने अपनी यात्राओं एवं रामकृष्ण मिशन की स्थापना द्वारा पूर्व और पश्चिम के बीच निश्चय ही एक आध्यात्मिक पुल का निर्माण किया है। विश्व-विख्यात फ्रांसीसी उपन्यासकार रोमां रोलां कृत विवेकानन्द की जीवनी का हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत कराकर साहित्य अकादेमी ने एक बड़े अभाव की पूर्ति की है। विवेकानन्द के जीवन, कार्यों एवं विचारों का सम्यक् परिचय तो इसमें है ही, रामकृष्ण के जीवन एवं सिद्धान्तों को भी संक्षिप्त रूप में दे दिया गया है, जिससे इस कृति की उपयोगिता और भी बढ़ गई है।

 
दो वर्ष भारत-भर में और अनन्तर तीन वर्ष विश्व-भर में उनका परिभ्रमण उनकी स्वतंत्र स्वाभाविक चेतना और सेवा-भावना का सहज ही यथेष्ट पूरक सिद्ध हुआ। वह घर-समाज के बंधन से मुक्त, स्वच्छंद, ईश्वर के साथ निरंतर अकेले घूमते रहे। उनके जीवन का कोई क्षण ऐसा न था जिसमें उन्होंने ग्राम में, नगर में, धनी के, निर्धन के जीवन-स्पन्दन की वेदना, लालसा, कुत्सा और पीड़ा से साक्षात् न किया हो। वह जन के जीवन से एकाकार हो गए। जीवन के महाग्रन्थ में उन्हें वह मिला जो पुस्तकालय की समस्त पोथियों में नहीं मिला था।
पथचारी शिक्षार्थी के रूप में कैसी अद्वितीय शिक्षा उनको मिली!... अस्तबल में या भिखारी-टोले में सो रहनेवाले जगत्-बन्धु ही नहीं थे, वह समदर्शी थे...आज अछूतों के आश्रय में पड़े तिरस्कृत मँगते हैं तो कल राजकुमारों के मेहमान हैं, प्रधानमन्त्रियों और महाराजाओं से बराबरी पर बात कर रहे हैं, कभी दीनबन्धु रूप में पीड़ितों की पीड़ा को समर्पित हो रहे हैं, तो कभी श्रेष्ठियों के ऐश्वर्य को चुनौती दे रहे हैं और उनके निर्मम मानस में दुखी जन के लिए ममता जगा रहे हैं। पंडितों की विद्या से भी उनका परिचय था और औद्योगिक एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था की उन समस्याओं से भी, जो जनजीवन की नियामक हैं। वह निरन्तर सीख रहे थे, सिखा रहे थे और अपने को धीरे-धीरे भारत की आत्मा, उसकी एकता और उसकी नियति का प्रतीक बनाते जा रहे थे। ये तत्त्व उनमें समाहित थे और सारे संसार ने इनके दर्शन विवेकानन्द में किये।
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Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Editor Not Selected
Publication Year 2008
Edition Year 2024, Ed. 5th
Pages 123p
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 22.5 X 14.5 X 1.5
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Romain Rolland

Author: Romain Rolland

रोमां रोलां

जन्म : 29 जनवरी, 1866; फ़्रांस

मशहूर फ़्रांसीसी नाटककार, उपन्यासकार, निबन्‍धकार, कला इतिहासकार। रंगमंच को अधिक लोकतांत्रिक बनाने में महत्‍त्‍वपूर्ण योगदान। इतिहास के प्राध्यापक रहे।

मानवतावादी होने के नाते भारतीय विचारकों-दार्शनिकों जैसे रवीन्द्रनाथ टैगोर, महात्मा गांधी आदि के कार्यों से प्रभावित। वेदान्त दर्शन और स्वामी विवेकानन्‍द से विशेष प्रभावित। 

प्रमुख कृतियाँ : ‘लाइफ़ ऑफ़ विवेकानन्‍द’, ‘लाइफ़ ऑफ़ रामाकृष्ण’, ‘महात्मा गांधी’, ‘दी पीपल्स थियेटर’, ‘मदर एंड चाइल्ड’, ‘द गेम ऑफ़ लव एंड डेथ’, ‘द रिवोल्ट ऑफ़ द मशीन्स’, ‘समर’, ‘द हम्बल लाइफ़ ऑफ़ द हीरो’, ‘अबव द बैटल’ आदि। 

सम्मान : 1915 में नोबेल पुरस्कार (साहित्य) से सम्मानित।

निधन : 30 दिसम्बर, 1944

 

 

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