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Vishvabhasha Hindi : Bharatiya Asmita Evam Mahatma Gandhi

Author: G. Gopinathan
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Vishvabhasha Hindi : Bharatiya Asmita Evam Mahatma Gandhi

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महात्मा गांधी ने न केवल हिन्दी-प्रचार आन्दोलन के द्वारा खड़ी बोली हिन्दी का हिन्दीतर प्रदेशों में और विदेशों में प्रचार-प्रसार किया, बल्कि अपनी पत्रकारिता के माध्यम से उसके आधुनिकीकरण और मानकीकरण का भी बुनियादी प्रयास किया। वे जानते थे कि सरल शब्द अधिक लोगों के दिलों तक पहुँच सकते हैं।

उनके प्रयासों और भावना को बुनियादी सन्दर्भ बनाकर लिखी गई इस पुस्तक की केन्द्रीय चिन्ता राष्ट्रीय और वैश्विक फलक पर हिन्दी की अवस्थिति और सम्भावित स्थान है। इनसे गुजरने से जो बात सबसे पहले हमारा ध्यान आकर्षित करती है, वह है हिन्दी-सम्बन्धी गांधी-दृष्टि। लेखक की स्पष्ट राय है कि गांधी जी भारत की सभी प्रमुख भाषाओं को जोड़ने में हिन्दी की महत्त्वपूर्ण भूमिका को अपने लेखन में बार-बार रेखांकित करते हैं।

इस पुस्तक में संगृहीत लेखों में संरचना की दृष्टि से पर्याप्त वैविध्य है। हिन्दी की भूमिका को लेखक ने कई रूपों में रेखांकित किया है। कहीं वह राष्ट्रीय अनुवाद-माध्यम तो कहीं अन्तर-एशियाई अनुवाद एवं सम्प्रेषण की समर्थ भाषा और कहीं विश्वभाषा के रूप में अन्तरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठित होने के लिए संकल्पित भाषा के रूप में उपस्थित हुई है।...विश्व हिन्दी सम्मेलनों में लेखक की सहभागिता के परिणाम हैं।

भाषा, साहित्य और संस्कृति के शिक्षण की प्रविधि क्या हो, भूमंडलीकरण के दौर में भारतीय अस्मिता की रक्षा कैसे हो और उसमें हिन्दी की भूमिका कैसी हो आदि सवालों पर भी लेखक ने इस पुस्तक में गम्भीरतापूर्वक और यथार्थपरक ढंग से विचार किया है।

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 152P
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1
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Author: G. Gopinathan

जी. गोपीनाथन


जन्‍म : जी. गोपीनाथन का जन्म 20 अप्रैल, 1943 को केरल के तिरुवनंतपुरम ज़ि‍ले के बलरामपुरम गाँव में हुआ था।

शिक्षा : हिन्‍दी में एम.ए., पीएच.डी. और डी.लिट्. की उपाधियाँ प्राप्त कीं।

जी. गोपीनाथन ने रूसी भाषा में डिप्लोमा प्राप्त कर कालिकट विश्वविद्यालय के हिन्‍दी विभाग में प्राध्यापक, रीडर, प्रोफ़ेसर एवं विभागाध्यक्ष रहे। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्‍दी विश्वविद्यालय, वर्धा में कुलपति, फिनलैंड के हेलसिंकी विश्वविद्यालय और वारसॉ यूनिवर्सिटी पोलैंड में विज़ि‍टिंग प्रोफ़ेसर रहे।

प्रकाशित प्रमुख कृतियाँ : ‘केरलियों की हिन्‍दी को देन’, ‘मलयालम की नई कविताएँ’, ‘अनुवाद : सिद्धान्‍त और प्रयोग’, ‘अनुवाद की समस्‍याएँ’, ‘केरल की सांस्‍कृतिक विरासत’, ‘क्रान्तिकारी सन्‍त श्रीनारायण गुरु की कविताएँ’, ‘विश्‍व भाषा हिन्‍दी की अस्मिता’ आदि।

उन्‍होंने ‘कालिकट यूनिवर्सिटी रिसर्च जर्नल’ (भाग 1, 2), ‘तुलनात्‍मक साहित्‍य विश्‍वकोश’, ‘बहुवचन’, ‘पुस्तक वार्त्ता’, ‘हिन्‍दी विमर्श’ का सम्‍पादन किया।

‘राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार’, ‘नातालि पुरस्कार’, ‘साहित्य साधना सम्मान’, ‘भाषा सेतु सम्मान’, ‘साहित्य वाचस्पति’, ‘कुसुम अहिन्‍दी भाषी हिन्‍दी सम्मान’, ‘सौहार्द सम्मान’ आदि अनेक सम्मानों से अलंकृत।

उन्‍होंने विश्व के प्रायः सभी प्रमुख देशों की अकादमिक यात्राएँ की हैं। 

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