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Sanskritik Rashtravad : Hashiye Ka Samaj Aur Hindi Upanyas

Author: Rohini Aggarwal
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Lokbharti Prakashan
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Sanskritik Rashtravad : Hashiye Ka Samaj Aur Hindi Upanyas

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‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद : हाशिए का समाज और हिन्दी उपन्यास’ वरिष्ठ आलोचक रोहिणी अग्रवाल की महत्त्वपूर्ण पुस्तक है जहाँ इतिहास-चेतना, राजनीतिक-दृष्टि और सामाजिक प्रतिबद्धता को आलोचनात्मक विश्लेषण की अनिवार्य दृष्टि बनाकर सत्ता-संरचना की जटिलताओं से वैचारिक मुठभेड़ की गई है। इस प्रक्रिया में वे जिस वैचारिक सजगता के साथ मुख्यधारा बनाम हाशिया, वर्चस्व बनाम प्रतिरोध, दमन बनाम संघर्ष की अपरिहार्य द्वन्द्वात्मक टकराहट की बारीकियों को पकड़ती हैं, उतनी ही प्रखरता के साथ विचार एवं अस्तित्व की गतिशील निर्मितियों को समय की सांस्कृतिक विकास-यात्रा के प्रमुख पड़ावों की तरह परखती हैं। यही कारण है कि उनकी आलोचना-दृष्टि का वितान सभ्यता-समीक्षा के गहन नैतिक दायित्व का दृष्टान्त बन जाता है।

हिन्दी व हिन्दीतर उपन्यासों के विखंडनपरक विश्लेषण के क्रम में यह पुस्तक किसानों, आदिवासियों, स्त्रियों, थर्ड जेंडर और झोंपड़पट्टी समाज के संघर्ष की विडम्बनात्मक ध्वनियों के समानान्तर सत्ता-संरचना के विविध उपकेन्द्रों की कूटनीतिक रणनीतियों को ही उजागर नहीं करती, साहित्य को सामाजिक-सांस्कृतिक परिवर्तन का सक्रिय और जवाबदेह उपकरण भी बनाती है। इसलिए यहाँ उपन्यास कंटेंट के मालगोदाम की तरह नहीं, बल्कि एक समग्र वैचारिक कलाकृति की तरह विश्लेषित किये गए हैं। ‘पाठ’ के रूप में उभरते विश्लेषण को अर्थ-निर्माण की रचनात्मक प्रविधि का रूप देना, भाषा में बहुव्यंजक अर्थध्वनियों को भरना, और संवाद की सहभागिता में पाठक की सक्रियता को शामिल करना इसकी सबसे बड़ी ताकत है।

ज़ाहिर है कि इस पुस्तक को पढ़ना हमारे समय की प्रश्नाकुल बेचैनियों को आलोचनात्मक विवेक के साथ जाँचना है। 

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 344p
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 2
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Rohini Aggarwal

Author: Rohini Aggarwal

रोहिणी अग्रवाल

रोहिणी अग्रवाल हिंदी कथा-आलोचना का विशिष्ट हस्ताक्षर हैं। वे प्रखर स्त्रीवादी चिंतक ही नहीं, आलोचना के पारंपरिक ढांचे में आवश्यक हस्तक्षेप कर उसे अधिक संवेदी, संवादपरक व सृजनशील बनाने वाली प्रयोगधर्मी रचनाकार भी हैं।

उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं—‘हिंदी उपन्यास में कामकाजी महिला’, ‘एक नज़र कृष्णा सोबती पर’, ‘इतिवृत्त की संरचना और संरूप’, ‘समकालीन कथा साहित्य : सरहदें और सरोकार’, ‘स्त्री लेखन : स्वप्न और संकल्प’, ‘साहित्य की ज़मीन और स्त्री मन के उच्छ्वास’, ‘हिंदी कहानी : वक़्त की शिनाख्त और सृजन का राग’, ‘हिंदी उपन्यास का स्त्री पाठ’, ‘साहित्य का स्त्री स्वर’, ‘हिंदी उपन्यास : समय से संवाद’, ‘कथालोचना के प्रतिमान’, ‘कहानी का स्त्री-समय’ (आलोचना); ‘घने बरगद तले’, ‘आओ माँ’, ‘हम परी हो जाएँ’ (कहानी-संग्रह); ‘लिखती हूँ मन’ (कविता-संग्रह); ‘मुक्तिबोध की प्रतिनिधि कहानियाँ’, ‘उषा प्रियंवदा की प्रतिनिधि कहानियाँ’ (सम्पादित पुस्तकें)।

पुरस्कार व सम्मान : ‘हरियाणा साहित्य अकादमी’, ‘स्पंदन आलोचना सम्मान’, ‘रेवांत मुक्तिबोध सम्मान’, ‘वनमाली कथा-आलोचना सम्मान’, ‘डॉ. शिवकुमार मिश्र स्मृति सम्मान’, ‘डॉ. रामविलास शर्मा स्मृति सम्मान’, ‘मीरा स्मृति सम्मान’।

सम्पर्क : [email protected] 

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