Facebook Pixel

Rashtriya Asmita Aur Purvottar Ka Sahitya

Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Lokbharti Prakashan
As low as ₹590.75 Regular Price ₹695.00
15% Off
In stock
SKU
Rashtriya Asmita Aur Purvottar Ka Sahitya

- +
Share:
Codicon

साहित्य समाज को बहुत दूर तक प्रभावित करने की क्षमता रखता है, बशर्ते उसमें वह सामर्थ्य हो। वह जन-मन की इतनी निकटता पा सके, समाज से इतना अपनापा बना सके, समाज से इतना अपनापन प्राप्त कर सके कि समाज उस पर विश्वास करे, उसे अपने जीवन में ढाल ले, अपना जीवन-दर्शन बना ले।

देश-व्यापी प्रसार के लिए किसी साहित्य का देश-व्यापी भाषा में आना आवश्यक होता है, भले ही मूलतः वह किसी भी भाषा में लिखा-रचा गया हो। वर्तमान में हिन्दी ही भारत की वह देश-व्यापी भाषा है जो पूरे देश को साहित्य के माध्यम से सांस्कृतिक एवं भावनात्मक धरातल पर जोड़ सकती है। यह कार्य वह यथाशक्य कर भी रही है। पूर्वोत्तर का साहित्य और लोक-साहित्य भी धीरे-धीरे करके हिन्दी में आ रहा है। आज इस क्षेत्र में हिन्दी में मौलिक लेखन भी हो रहा है और यहाँ का नया-पुराना साहित्य अनूदित रूप में भी हमारे सामने आ रहा है। उसका नोटिस बाहर भी लिया जा रहा है और उस पर हिन्दी में शोध-समीक्षात्मक तथा तुलनात्मक लेखन-अध्ययन पूर्वोत्तर में भी चल रहा है। हमारी राष्ट्रीय अस्मिता को रेखांकित कराने का यह एक प्रभावी उपक्रम है। परन्तु यह प्रयास अभी नाकाफी है। इस कार्य को गति देने की आवश्यकता है। ‘राष्ट्रीय अस्मिता और पूर्वोत्तर का साहित्य’ पुस्तक का लेखन इसी दिशा में एक छोटा-सा प्रयास है। 

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 152p
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 1.5
Write Your Own Review
You're reviewing:Rashtriya Asmita Aur Purvottar Ka Sahitya
Your Rating

Author: Harish Kumar Sharma

प्रो. हरीशकुमार शर्मा

1 जुलाई, 1971 को उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद परा बहाउद्दीनपुर गाँव में जन्म। हिन्दी विषय में एम. ए. और पी-एच.डी. तक की शिक्षा। अरुणाचल प्रदेश में उच्चतर स्तर पर हिन्दी-अध्यापन। राजीव गाँधी (केन्द्रीय) विश्वविद्यालय, ईटानगर में हिन्दी विभागाध्यक्ष तथा भाषा संकायाध्यक्ष का दायित्व निभाया। वर्तमान में सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु के हिन्दी विभाग में आचार्य पद पर कार्यरत। कई विश्वविद्यालयों की हिन्दी पाठ्यक्रम समितियों के अध्यक्ष एवं सदस्य के रूप में सहयोग।

प्रकाशित पुस्तकें—तुलसी-साहित्य का आधुनिक सन्दर्भ; भाषा, संस्कृति और साहित्य; फणीश्वरनाथ रेणु के उपन्यासों में लोक-संस्कृति; राष्ट्रीय स्मृति, संस्कृति और भाषा; अरुणाचल प्रदेश की लोककथाएँ; देश की हिन्दी तथा याद करें कुर्बानी। हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयागराज के सम्मेलन सम्मान; बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन, पटना के साहित्य सम्मेलन शताब्दी सम्मान  जैसे अनेक सम्मान प्राप्त।

सम्प्रति : हिन्दी विभाग, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थ नगर, उत्तर प्रदेश-272202

ई-मेल : [email protected]

Read More
Books by this Author
New Releases
Back to Top