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Purv Madhyakaleen Bharat-Text Book

Author: Prashant Gaurav
ISBN: 9788126718252
Edition: 2016, Ed. 2nd
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
₹400.00
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9788126718252
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पूर्वमध्यकाल का इतिहास सम्पूर्ण भारतीय इतिहास का सर्वाधिक विवादास्पद, रुचिपूर्ण और अत्यधिक महत्त्वपूर्ण चरण है। अध्ययन की सुविधा के लिए 600 ई. और 1200 ई. के बीच के काल को परिपक्व पूर्वमध्यकाल कहते हैं। गहराई से देखने पर पता चलता है कि पूर्वमध्यकाल की प्रमुख विशेषताओं का जन्म गुप्तकाल में ही हो चुका था। इस काल को सामन्तवाद, नगरों का पतन और उत्थान, नवीन सामाजिक-व्यवस्था का काल, क्षेत्रीय भाषा और क्षेत्रीय धर्म का काल अथवा मन्दिरों का युग के नाम से भी जाना जा सकता है।

दक्षिण भारत में विशाल मन्दिरों का निर्माण इस काल में हुआ। देवदासियों की नवीन परम्परा विकसित हुई। भारतीय दर्शन में नवीन तत्त्व देखे जाने लगे। भक्ति, तंत्र-मंत्र (और जादू-टोना का महत्त्व बढ़ा। शंकराचार्य के दर्शन को नवीन शैली में लोकप्रियता प्राप्त हुई। क्षेत्रीय शासकों, क्षेत्रीय धर्म एवं क्षेत्रीय भाषा की संख्या बढ़ी। प्रशासनिक एवं धार्मिक केन्द्रों की संख्या बढ़ी और व्यापारिक नगरों की संख्या नगण्य रही। जातियों एवं उपजातियों की संख्या सौ से अधिक हो गई। छोटे-बड़े और काले-गोरे देवी-देवता पाए जाने लगे। जनसमुदाय की आर्थिक दशा संकटपूर्ण रही। क्षत्रिय के बदले राजपूत पाए जाने लगे। राजाओं के बीच हमेशा युद्ध का माहौल बना रहता था। इनकी आपसी अनेकता से विदेशी शक्तियों ने लाभ उठाया। सबसे पहले अरबों के आक्रमण हुए और उसके बाद गोरी और गज़नी के आक्रमणों ने भारत में मुस्लिम शासन की नींव डाल दी।

इन सभी तथ्यों पर इस पुस्तक में प्रकाश डाला गया है। गुप्तकाल के पतन के बाद से लेकर गोरी-गज़नी के आक्रमण और उनके प्रभाव तक की इसमें विवेचना की गई है।

केन्द्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं, प्रान्तीय प्रतियोगी परीक्षाओं और दिल्ली तथा पटना विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम को ध्यान में रखते हुए प्रस्तुत पुस्तक को तैयार किया गया है। विश्वास है, छात्रों के लिए यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2009
Edition Year 2016, Ed. 2nd
Pages 432p
Price ₹400.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 2
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Prashant Gaurav

Author: Prashant Gaurav

प्रशान्त गौरव

प्रशान्त गौरव का जन्म 1 दिसम्बर, 1973 को हुआ। उन्होंने एम.ए. (इतिहास), एम.बी.ए. (टूरिज्म) और पी-एच.डी. (ब्रह्मवैवर्तपुराण) की उपाधि प्राप्त की।

उनकी प्रकाशित पुस्तकें हैं—‘ब्रह्मवैवर्तपुराण में समाज एवं धर्म’, ‘बिहार का राजनीतिक इतिहास’, ‘प्राचीन भारत में समाज एवं अर्थव्यवस्था’, ‘भारत का सरल इतिहास’, ‘भारतीय इतिहास कोश’ आदि।

अब तक राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय स्तर के सेमिनार एवं कॉन्फ्रेंस में कई शोध-पत्र प्रस्तुत कर चुके हैं। उनके  शोध-पत्र राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय स्तर के रेफर्ड जर्नल, सम्पादित ग्रन्थ एवं कॉन्फ्रेंस प्रोसीडिंग में प्रकाशित हुए। कई शोध-ग्रन्थों के सह-सम्पादक भी हैं। अनगिनत सेमिनार, वर्कशॉप एवं कॉन्फ्रेंस में मुख्य वक्ता एवं चेयरपर्सन के रूप में सम्मिलित रहे हैं। इतिहास से सम्बन्धित संस्थाओं—भारतीय इतिहास संकलन समिति, नई दिल्ली; इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस; बिहार इतिहास परिषद्; इंडियन सोसाइटी फ़ॉर बुद्धिस्ट स्टडी, जम्मू एवं भारतीय पुराण अध्ययन संस्थान, नई दिल्ली—के आजीवन सदस्य हैं।

उन्हें इंडियन सोसाइटी फ़ॉर बुद्धिस्ट स्टडी, जम्मू विश्वविद्यालय, जम्मू द्वारा ‘महाकवि स्वयंभू पुरस्कार’ एवं सेंट्रल इंडियन हिस्टोरिकल रिसर्च फ़ाउंडेशन, ग्वालियर के द्वारा ‘प्रोफ़ेसर एस.आर. वर्मा मेमोरियल पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है।

फ़िलहाल चंडीगढ़ में पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज में इतिहास विभाग में अध्यापक हैं। 

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