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Pratinidhi Kavitayein: Navin Sagar

Author: Navin Sagar
Editor: Avinash Mishra
Edition: 2025, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
As low as ₹149.25 Regular Price ₹199.00
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Pratinidhi Kavitayein: Navin Sagar

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नवीन सागर की कविताओं को पढ़ते हुए आप हिन्दी कविता की दुनिया में अपनी मौजूदा रिहायश से उठकर कहीं और जाने के लिए चल पड़‌ते हैं—एक ज़्यादा गहरी, ज़्यादा परतदार, ज़्यादा नाज़ुक और ज़्यादा ठोस जगह की तरफ़। वह जगह जहाँ आपको अपने न समझ में आनेवाले लेकिन मारक दुख की सहज, स्पष्ट और चित्र जैसी अभिव्यक्ति मिलती है। हमारी भाषा ने कम ही ऐसी कविताएँ पाई हैं, जैसी ये सारी हैं।

नवीन सागर की कविता-पुस्तकें लम्बे समय से अनुपलब्ध हैं। हालाँकि इस बीच उनकी कविताओं की तरफ़, ख़ासतौर पर नई पीढ़ी का ध्यान उल्लेखनीय ढंग से गया है। ऐसे में उनके देहान्त के लगभग पच्चीस वर्ष बाद उनकी कविताओं से यह प्रतिनिधि चयन प्रकाशित हो रहा है। उम्मीद है कि यह पुस्तक लगभग भूले हुए, लेकिन अत्यन्त महत्त्वपूर्ण एक कवि को विचार के केन्द्र में लाएगी। 

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Avinash Mishra
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 120p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 17.5 X 12 X 1
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Author: Navin Sagar

नवीन सागर

नवीन सागर का जन्म 20 नवंबर, 1948 को सागर, मध्य प्रदेश में हुआ था। उच्च शिक्षा सागर विश्वविद्यालय से हुई। उनकी श्रेष्ठता और कीर्ति का आधार उनकी कविताएँ और कहानियाँ हैं। 1989 में उनका एक कहानी-संग्रह ‘उसका स्कूल’ तथा बाल-कविताओं का संग्रह ‘आसमान भी दंग’ प्रकाशित हुआ। पहला कविता-संग्रह ‘नींद से लम्बी रात’ 1996 में प्रकाशित हुआ। 14 अप्रैल, 2000 को भोपाल में उनके आकस्मिक निधन के बाद  2001 में उनका दूसरा कविता-संग्रह ‘जब ख़ुद नहीं था’ और 2006 में तीसरा कविता-संग्रह ‘हर घर से ग़ायब’ प्रकाशित हुआ। उनकी ‘सम्पूर्ण कहानियाँ’ 2019 में और बच्चों-किशोरों के लिए कविताओं की एक किताब ‘तुम भी आना’ 2020 में प्रकाशित हुई। निधन से पूर्व, वे मध्य प्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी में कार्यरत रहे। उनकी याद में नवंबर 2007 में साहित्यिक मासिक पत्रिका ‘कथादेश’ (सम्पादक : हरिनारायण) ने ‘नवीन सागर विशेषांक’ (अतिथि सम्पादक : रामकुमार तिवारी) प्रकाशित किया, जिसमें हिन्दी के कई उल्लेखनीय कवियों-लेखकों-आलोचकों ने नवीन सागर के व्यक्तित्व और कृतित्व पर अपने विचार रखे। 

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