Pashchatya Sahitya Chintan

Literary Criticism
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Pashchatya Sahitya Chintan
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पश्चिम में साहित्य-चिन्तन की सुदीर्घ परम्परा को हिन्दी के पाठकों के लिए प्रामाणिक और सहज ग्राह्य रूप में सुलभ कराने की दिशा में प्रस्तुत ग्रन्थ एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है। प्लेटो से बीसवीं शताब्दी तक पाश्चात्य काव्य-चिन्तन में योगदान देनेवाले सभी महत्त्वपूर्ण विचारकों और प्रवृत्तियों का प्रामाणिक विवेचन इस रचना की विशेषता है; अकादमिक अनुशासन से एक साथ युक्त और मुक्त विश्लेषण-पद्धति इसका प्रमुख आकर्षण है। ग्रन्थ की सामग्री का आधार मूल स्रोत है। बक़ौल प्लेटो : ‘सत्य के अनुकरण का अनुकरण ग्रन्थ की विश्वसनीयता तथा लेखिका की प्रतिबद्धता’ का कारण भी यही है। प्रस्तुत कृति से इस विषय के सुधी पाठकों की बहुत बड़ी आवश्यकता की पूर्ति होती है।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 1990
Edition Year 2020, Ed. 10th
Pages 195p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 22.5 X 14 X 2
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Editorial Review

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Nirmala Jain

Author: Nirmala Jain

डॉ निर्मला जैन

हिन्दी की जानी-मानी आलोचक निर्मला जैन का जन्म सन् 1932 में दिल्ली के व्यापारी परिवार में हुआ। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.ए., एम.ए., पीएच.डी. और डी.लिट की उपाधियाँ प्राप्त कीं।

लेडी श्रीराम कॉलेज (1956-70) और फिर दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग (1970-1996) में अध्यापन किया। इस दौरान वे हिन्दी विभाग की अध्यक्ष (1981-84) और कई वर्षों तक दक्षिण-परिसर में विभाग की प्रभारी प्रोफ़ेसर रहीं।

प्रकाशन : 1962 से अनेक मौलिक ग्रन्थों की रचना, अनुवाद और सम्पादन।

प्रमुख रचनाएँ : ‘आधुनिक हिन्दी काव्य में रूप-विधाएँ’, ‘रस-सिद्धान्त और सौन्दर्यशास्त्र’, ‘आधुनिक साहित्य : मूल्य और मूल्यांकन’, ‘हिन्दी आलोचना का दूसरा पाठ’, ‘कथा-समय में तीन हमसफ़र’, ‘दिल्ली : शहर-दर-शहर’, -‘ज़माने में हम’, ‘पाश्चात्य साहित्य-चिन्तन’, ‘कविता का प्रति-संसार’ (आलोचना); 'उदात्त के विषय में’, 'बांग्ला साहित्य का इतिहास’, 'समाजवादी साहित्य : विकास की समस्याएँ’, 'भारत की खोज’, 'एडविना और नेहरू’, 'सच, प्यार और थोड़ी-सी शरारत’ (अनुवाद) ; ‘नई समीक्षा के प्रतिमान’, ‘साहित्य का समाजशास्त्रीय चिन्तन’, ‘महादेवी साहित्य’ (4 खंड), ‘जैनेन्द्र रचनावली’ (12 खंड)।

पुरस्कार : ‘सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार’, ‘रामचन्द्र शुक्ल पुरस्कार’, ‘हरजीमल डालमिया पुरस्कार’, ‘तुलसी पुरस्कार’, ‘केन्द्रीय हिन्दी संस्थान’ (आगरा) का ‘सुब्रह्मण्यम भारती सम्मान’, ‘हिन्दी अकादमी’ का ‘साहित्यकार सम्मान’, ‘साहित्य अकादेमी’ का ‘अनुवाद पुरस्कार’, ‘संतोष कोली स्‍मृति सम्‍मान’ आदि।

सम्प्रति : स्वतंत्र लेखन।

 

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