Pashchatya Kavya Chintan

Literary Criticism
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Pashchatya Kavya Chintan

भारतीय काव्यशास्त्र की भाँति पाश्चात्य काव्य-चिन्तन की भी एक सुदीर्घ, समृद्ध एवं विस्तीर्ण परम्परा है जिसके विकास में पाश्चात्य विचारकों एवं काव्यान्दोलनों का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। पाश्चात्य विचारकों तथा आलोचकों ने अत्यन्त प्राचीन काल से काव्य तथा कलाकृतियों में निहित सौन्दर्य-तत्त्व की विभिन्न दृष्टिकोणों से गहराई में जाकर छानबीन की है और काव्य-चिन्तन के अनेकों शिखर पार किए हैं। पाश्चात्य काव्य-चिन्तन के इस व्यापक फलक के निर्माण में विविध चिन्तन-सरणियों, विचारधाराओं, कवि-स्वभावों, संस्कारों एवं देशकाल की परिस्थितियों का भी उल्लेखनीय योगदान रहा है।

पाश्चात्य मनीषा ने काव्य-चिन्तन के क्षेत्र में सदैव प्रयोग किए हैं और अपनी गतिशील सोच द्वारा परम्परा के साथ घात-प्रतिघात करते हुए उसे पुरस्कृत किया है। इन काव्यान्दोलनों का महत्त्व पाश्चात्य विचारकों के योगदान की तुलना में ज़्यादा ही है, क्योंकि प्लेटो से लेकर जैक्स देरिदा तक यदि विचारकों की एक सुदीर्घ शृंखला उपलब्ध होती है तो काव्यान्दोलनों की परम्परा और भी ज़्यादा समृद्ध तथा विस्मयकारी है।

ऐसी स्थिति में इन काव्यान्दोलनों के समस्त आयामों को समेटते हुए उन्हें एक सूत्र में पिरोकर प्रस्तुत करने की अपेक्षा बरकरार है। प्रस्तुत पुस्तक इसी दिशा में एक सार्थक प्रयास है।

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Language Hindi
Format Hard Back
Edition Year 2016, Ed. 3rd
Pages 266p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 2
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Editorial Review

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Karunashankar Upadhyay

Author: Karunashankar Upadhyay

करुणाशंकर उपाध्याय

जन्म : 15 अप्रैल, 1968 को घोरका तालुकदारी, शिवगढ़, प्रतापगढ़ (उ.प्र.)।

शिक्षा : एम.ए., पीएच.डी., एस.ई.टी.।

पोस्ट डॉक्टरल रिसर्च : ‘पाश्चात्य काव्य-चिन्तन के विविध आन्दोलन’ पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की अध्येतावृत्ति पर शोधकार्य। ‘हिन्दी आचार्य कवियों का काव्यशास्त्रीय चिन्तन’ विषय पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा प्रदत्त बृहद् शोध प्रकल्प ।

प्रकाशित कृतियाँ : ‘सर्जना की परख’, ‘साहित्यकार बेकल : संवेदना और शिल्प’, ‘आधुनिक हिन्दी कविता में काव्य-चिन्तन’, ‘मध्यकालीन काव्य-चिन्तन और संवेदना’, ‘पाश्चात्य काव्य-चिन्तन’, ‘विविधा’, ‘आधुनिक कविता का पुनर्पाठ’, ‘हिन्दी कथा-साहित्य का पुनर्पाठ’, ‘आवाँ : विमर्श’, ‘हिन्दी साहित्य : मूल्य और मूल्यांकन’, ‘वक्रतुंड : मिथक की समकालीनता’, ‘ब्लैक होल : विमर्श’, ‘माया गोविन्द : सृजन के अनछुए सन्दर्भ’ तथा ‘साहित्य और संस्कृति के सरोकार’ ।

सम्मान/पुरस्कार : महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादेमी का ‘बाबूराव विष्णु पराडकर पुरस्कार’ तथा ‘महावीर प्रसाद द्विवेदी सम्मान’, ‘हिन्दी सेवी सम्मान’, ‘पं. दीनदयाल उपाध्याय आदर्श शिक्षक सम्मान’, ‘आशीर्वाद राजभाषा सम्मान’, ‘विश्व हिन्दी सेवा सम्मान’, ‘शिक्षक भारती गौरव सम्मान’, मुम्‍बई विश्वविद्यालय का ‘सर्वोत्तम शिक्षक सम्मान’, हिन्दी साहित्य सम्मलेन, प्रयाग का ‘सम्मलेन सम्मान’, ‘जीवन्ती फ़ाउंडेशन का ‘साहित्य गौरव सम्मान’ तथा ‘भारती गौरव सम्मान’।

सम्पादन : दो दर्जन से ज्‍़यादा पुस्तकों का सम्पादन।

सहलेखन : ‘मानव मूल्यपरक शब्दावली का विश्वकोश’ तथा ‘तुलनात्मक साहित्य का विश्वकोश’ ।

सम्प्रति : प्रोफ़ेसर एवं अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, मुम्बई विश्वविद्यालय, मुम्बई-400098

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