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Murshidabad Ki Mallika

Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Lokbharti Prakashan
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Murshidabad Ki Mallika

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राजगोपाल सिंह वर्मा इतिहास मर्मज्ञ तो हैं ही, वे इतिहास के अनूठे, लीक से हटकर चले महिला पात्रों को अपने कथा-साहित्य का विषय बनाते रहे हैं। वे महीन से महीन तथ्यों की कीलों पर कथा की बारीक मनोवैज्ञानिक जरदोजी करते हैं। कथा है तो मन और उसके खेल भी होंगे। यह मन और मस्तिष्क अकसर ऐतिहासिक उपन्यासों में अनुपस्थित मिलता है, लेकिन राजगोपाल सिंह वर्मा तथ्यों के घटनाक्रमों के चक्र में भी मुन्नी बेगम के अन्तर्द्वन्द्व और बौद्धिक-राजनैतिक दाँव-पेंच, व्यवहारकुशलता के चलते ईस्ट इंडिया कम्पनी के अफसरों से सौहार्द के दृश्य इस उपन्यास को जीवन्त बनाते हैं।

मुन्नी बेगम, मीर जाफर की पत्नी रही है, गद्दारी के इतिहास की सियाही मुन्नी के हिस्से भी आ सकती थी, मगर वह व्यवहारकुशल रही। लेखक स्वीकार करते हैं कि मुन्नी बेगम राष्ट्रभक्त किसी तरह भी नहीं थी। सो, नायिका होने के वे उदात्त तत्व उसमें न हों, मगर एक अनाथ, बंजारा नर्तकी के पहले बेमन से मीर जाफर की पत्नी बनने, फिर अपने वजूद को पहचानने, जाफर की मृत्यु के बाद अपने अस्तित्व को बनाए रखने की कूटनीतिक व्यवहारकुशलता उसे नायिका बनने की सलाहियत जरूर देती है।

एक ऐसी स्त्री जिसे लेकर ब्रिटिश संसद में भारत के सर्वशक्तिशाली, सम्पन्न और कार्यकुशल गवर्नर-जनरल वारेन हेस्टिंग्स जैसे व्यक्ति पर महाभियोग चला हो, मुन्नी बेगम के नाम की गूँज उठी हो; उसमें कुछ खास तो होगा ही।

—मनीषा कुलश्रेष्ठ

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 208p
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1.5
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Rajgopal Singh Verma

Author: Rajgopal Singh Verma

राजगोपाल सिंह वर्मा

राजगोपाल सिंह वर्मा का जन्म 14 मई, 1957 को मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश में हुआ। उन्होंने पत्रकारिता तथा इतिहास में स्नातकोत्तर किया है। अब तक कुल 32 पुस्तकें प्रकाशित जिनमें 26 मूल तथा उर्दू, पंजाबी और अंग्रेज़ी में अनूदित चार पुस्तकें भी शामिल हैं। उन्होंने मुख्यतः ऐतिहासिक विषयों और जीवनीपरक किताबों का लेखन किया है।

उनकी प्रमुख पुस्तकें हैं—‘बेगम समरू का सच : सरधना की चर्चित बेगम की कथा’, ‘पहली औरत : बेगम राना लियाकत अली की जीवनी’, ‘1857 का शंखनाद : उत्तर दोआब के लोक का संघर्ष’, ‘चिनहट : 1857 संघर्ष की गौरव-गाथा’, ‘किंगमेकर्स : मुग़ल बादशाहों पर भारी दो सैयद भाइयों की गाथा’, ‘औपनिवेशिक काल की जुनूनी महिलाएँ’, ‘जाने वो कैसे लोग थे : 1857 के क्रान्तिकारी’, ‘आख़िरी मुग़ल बादशाह का कोर्ट मार्शल’, ‘स्वर्णा : टैगोर की अल्पचर्चित विदुषी बहन की जीवनी’, ‘फ़िरंगी राजा’ (ऐतिहासिक उपन्यास), ‘दुर्गावती : गढ़ा की पराक्रमी रानी’, ‘जॉर्ज थॉमस : हांसी का फ़िरंगी राजा’, ‘सुभाष-एमिली : अधूरे प्रेम की पूरी कहानी’।

उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार की साहित्यिक पत्रिका ‘उत्तर प्रदेश’ का पाँच वर्ष तक सम्पादन किया तथा केन्द्र सरकार के अधीन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और लघु उद्योग मंत्रालय की पत्रिकाओं के सम्पादकीय दायित्व का भी निर्वहन किया। उन्हें ‘पं. महावीर प्रसाद द्विवेदी सम्मान’, ‘पाण्डेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ सम्मान’, कमलेश्वर स्मृति कथा सम्मान, ‘प्रेमचन्द सम्मान’ तथा ‘हरिवंशराय ‘बच्चन’ सम्मान से सम्मानित किया गया है।

ई-मेल : [email protected] 

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