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Kuchh Panktiyan

Author: Gyanranjan
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Kuchh Panktiyan

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 ‘कुछ पंक्तियाँ’ ‘पहल’ के सम्पादकीय एवं प्रकाशकीय आलेखों का संकलन है। समसामयिक राजनीति और साहित्य-समाज के प्रतिक्रियावादी तत्वों को लेकर इन आलेखों का जनपक्षधर स्टैंड अपने समय में जितना विचारोत्तेजक, बहस तलब और प्रासंगिक था आज भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है। इस सन्दर्भ में ज्ञानरंजन की ये पंक्तियाँ देखी जा सकती है जो उन्होंने पहल-2 के सम्पादकीय में लिखा था।—

“‘पहल’ का प्रकाशन मुख्य रूप से लेखकों, बुद्धिजीवियों के लिए नहीं बल्कि पाठकों की उस बड़ी संख्या के लिए हुआ है जो एक ख़ास तरह की तैयारी के लिए तैयार होने को है। हम स्पष्ट घोषित करते हैं कि हमारा उद्देश्य क्रांतिकारी चेतना की व्यापक शिक्षा का है।”

अगस्त 1973 में प्रकाशित अपने पहले अंक से लेकर पूरे पैंतीस साल ‘पहल’ अपनी इस प्रतिज्ञा पर क़ायम ही नहीं रही बल्कि तमाम आलोचनाओं और छिद्रान्वेषण के बावजूद पाठकों के बीच अपनी जगह बढ़ाती रही। और, लघु-पत्रिका आन्दोलन में अपनी वैचारिक धार और दृढ़ता के चलते एक प्रतिमान के रूप में पहचानी गई।

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 232p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1.5
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Gyanranjan

Author: Gyanranjan

ज्ञानरंजन 

ज्ञानरंजन का जन्म 21 नवम्बर, 1936 को महाराष्ट्र के अकोला ज़ि‍ले में हुआ। प्रारम्भिक जीवन महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में व्यतीत हुआ। उच्च शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हुई। 2013 में जबलपुर विश्वविद्यालय द्वारा मानद ‘डॉक्टर ऑफ़ लिटरेचर’ की उपाधि प्रदत्त (मानद डी.लिट.)।

जबलपुर विश्वविद्यालय से सम्बद्ध जी. एस. कॉलेज में हिन्दी के प्रोफ़ेसर रहे और चौंतीस वर्ष की सेवा के बाद 1996 में सेवानिवृत्त।

सातवें दशक के प्रमुख कथाकार। अनेक कहानी-संग्रह प्रकाशित। अनूठी गद्य रचनाओं की एक क़िताब कबाड़खाना बहुत लोकप्रिय हुई। कहानियाँ देश-विदेश के अनेक विश्वविद्यालयों में उच्चतर पाठ्यक्रमों में पढ़ाई जाती हैं। शान्ति निकेतन से कहानियों का एक संग्रह बांग्ला में अनूदित होकर प्रकाशित। अंग्रेज़ी, पोल, रूसी, जापानी, फ़ारसी और जर्मन भाषाओं में कहानियाँ प्रकाशित। 

आपातकाल के आघातों के बावजूद 35 वर्ष निरन्तर विख्यात साहित्यिक पत्रिका ‘पहल’ का संपादन व प्रकाशन। 2 वर्ष के अन्तराल के बाद पुनः प्रकाशित। 

सम्मान : ‘सोवियत लैंड नेहरू अवार्ड’, हिन्दी संस्थान का ‘साहित्य भूषण सम्मान’, म.प्र. साहित्य परिषद का ‘सुभद्रा कुमारी चौहान’ और 'अनिल कुमार पुरस्कार’, मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग का ‘शिखर सम्मान’ और ‘मैथिलीशरण गुप्त सम्मान’, भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता का ‘प्रतिभा सम्मान’, ‘शमशेर सम्मान’ और पाखी का ‘शिखर सम्मान’, भारतीय ज्ञानपीठ का अखिल भारतीय ‘ज्ञानगरिमा मानद अलंकरण’, अमर उजाला का ‘शब्द सम्मान’।

आपातकाल के प्रतिरोध में मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग का एक पुरस्कार और मुक्तिबोध फ़ेलोशिप का अस्वीकार।

ग्रीनविच विलेज (न्यूयार्क) में सातवें-आठवें दशक में कहानियों पर फ़िल्म निर्माण। भारतीय दूरदर्शन द्वारा जीवन और कृतित्व पर एक पूरी फ़िल्म। आई.सी.सी.आर. (विदेश मंत्रालय) समेत देश की अनेक उच्चतर संस्थाओं की सामयिक सदस्यताएँ। मध्य प्रदेश प्रगतिशील लेखक संघ के ज्वलंत वर्षों में लम्बे समय तक उसके महासचिव रहे। हरिशंकर परसाई के साथ राष्ट्रीय नाट्य संस्था 'विवेचना' के संस्थापक सदस्य भी रहे।
निधन : 07 जनवरी, 2026

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