सच्ची है या है यह कच्ची, कैसी अपनी प्रीत लिखो,
उसने आज कहा है मुझसे, मुझ पर कोई गीत लिखो।
‘नीला फूल’ गीतों का ऐसा संग्रह है जिसमें पारिवारिक सम्बन्धों से लेकर देश, ईश्वर-भक्ति, तीज-त्योहार और मनुष्य की भिन्न-भिन्न मनस्थितियों को लेकर लिखे गए भावप्रवण गीत संकलित हैं।
गीतों को कविता का वह रूप समझा जाता है जो मन की सबसे कोमल भावनाओं को ऐसी शैली में व्यक्त करता है जिससे हमारी अभिव्यक्ति एक तरल और याद रह जानेवाले रूप में हमेशा के लिए हमारे पास रह जाती है। वे हमें याद रहते हैं और ऐसे अवसरों पर हमारा साथ देते हैं जब हम किसी निर्वचनीय भावना को व्यक्त करना चाहते हैं।
इस पुस्तक में शामिल गीतों में सरल और प्रवहमान शब्दावली में अत्यन्त अर्थपूर्ण ढंग से ऐसे विषयों को भी गीत में ढाल दिया गया है जो सामान्यतः गीतों में स्थान नहीं पाते, ‘अदरक वाली चाय’ शीर्षक गीत की ये पंक्तियाँ दृष्टव्य हैं—
धीमी-धीमी लौ में हमने, मन की बात उबाली
जनम-मरण की सौगन्धों की, ताजी तुलसी डाली
दोनों मिलकर लिख दें आओ, एक नया अध्याय
देखो तुमको बुला रही है, अदरक वाली चाय
कवि के अनुसार, ‘राम मेरे गीतों की प्रेरणा भी हैं, विषय भी और मेरे गीतों के अर्थ भी।’ इसलिए राम, उर्मिला, तुलसी, कृष्ण आदि को सम्बोधित-समर्पित गीत यहाँ हैं तो होली, दीवाली और ईद का उत्सव मनाने वाले गीत भी हैं।
जब तक आँसू हिचकी सिसकी, दुख नैराश्य निराशा है
जब तक मुस्कानें रूठी हैं, जब तक जग दुर्वासा है
मैं घावों पर गीत लगाने, की सौगन्ध उठाता हूँ!
गीत प्रेम के गाता हूँ मैं, गीत प्रेम के गाता हूँ!!
| Language | Hindi |
|---|---|
| Binding | Paper Back |
| Translator | Not Selected |
| Editor | Not Selected |
| Publication Year | 2026 |
| Edition Year | 2026, Ed. 1st |
| Pages | 240p |
| Publisher | Radhakrishna Prakashan |
| Dimensions | 21.5 X 14 X 1.5 |