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Mahayogiraj Gorakhnath

Edition: 2025, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Radhakrishna Prakashan
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Mahayogiraj Gorakhnath

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‘महायोगिराज गोरखनाथ’ नाथपन्थ की अनन्य विभूति गुरु गोरखनाथ का शोधपूर्ण, विस्तृत और अद्यतन जीवन चरित्र है। भारत की अनेक विभूतियों की तरह, गोरखनाथ के भी कृतित्व और कीर्ति से जनसामान्य जितना परिचित है, उतना उनके व्यक्तिगत जीवन से नहीं। गोरखनाथ ने भी, अगर उनके द्वारा ‘काफिर-बोध’ में दिए गए कुछ संकेतों को छोड़ दें तो अपने व्यक्तिगत जीवन का उल्लेख लगभग नहीं किया है। वस्तुतः दादूपन्थ के सन्त चैनजी की लिखी 'गोरख जनमलीला' ही एकमात्र सबसे पुराना लिखित स्रोत है जिसमें गोरखनाथ की जीवनकथा दी गई है। नाथ-सिद्धों की परम्परा में गोरखनाथ के बारे में जो कुछ श्रुतियाँ पहले से मौजूद थीं, उन्हों को चैनजी ने अपनी कृति में छन्दोबद्ध कर दिया है। स्वाभाविक ही गोरखनाथ सम्बन्धी चर्चाओं का मुख्य आधार ‘गोरख जनमलीला’ रही है।

लेकिन ब्रजेन्द्रकुमार सिंहल ने अपने इस ग्रन्थ में गोरख जनमलीला का अनुवाद प्रस्तुत करने के साथ-साथ उसमें वर्णित प्रमेय को विभिन्न ऐतिहासिक पुरातात्त्विक और अन्यान्य साक्ष्यों के साथ रखकर तथ्यगत प्रामाणिकता स्थापित करने का स्तुत्य कार्य किया है। इस प्रकार यह पुस्तक गुरु गोरखनाथ के व्यक्तित्व और कृतित्व से सांगोपांग रूप से परिचित कराती है। साथ ही नाथ-परम्परा, उसके विपुल साहित्य तथा उसकी सुदीर्घ शिष्य-परम्परा और उस परम्परा के अवदान का यथोचित उल्लेख करते हुए एक समग्र परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत करती है। 

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 776p
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 5.5
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Brajendra Kumar Singhal

Author: Brajendra Kumar Singhal

ब्रजेन्द्रकुमार सिंहल

ब्रजेन्द्रकुमार सिंहल का जन्म 23 नवम्बर, 1956 को गंगापुर सिटी, जिला सवाईमाधोपुर, राजस्थान में हुआ। वे निर्गुणी सन्त-साहित्य, विशेषकर रामस्नेही सम्प्रदाय और दादूपन्ध सहित अनेक सन्त-भक्त सम्प्रदायों के साहित्य और इतिहास तथा प्राग्‌आधुनिक हिन्दी-साहित्य के अधिकारी विद्वान हैं। उन्होंने संस्कृत-साहित्य और सन्त-वाणियों और वेदान्त-ग्रंथों का विशेष अध्ययन किया है। उनकी 53 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। जिनमें प्रमुख हैं—श्रीरामचरण चरितामृत, श्रीसुरतराम चरितामृत, श्रीसुरतरामवाणी पूर्वार्द्ध (सटीक), श्रीरामप्रतापवाणी (पूर्वार्द्ध), रामस्नेही मत-सिद्धान्त-दर्पण (पूर्वार्द्ध), श्रीरामनिवास-वाणी, आचार्य हरिदास-वाणी, आचार्य हिम्मतराम ग्रन्थावली (सटीक), श्रीरामसेवकवाणी, श्रीपोहकरदास वाणी, श्रीमुरलीरामवाणी, श्रीजगनाथ-ग्रंथावली (सभूमिका), श्रीहरिराम-वाणी, मौरा-चरितामृत', वषनांवाणी (सटीक), टीला पदावली (सटीक), नाम-प्रतीत-भगतमाला (सटीक), नरसीजी रो मोहेरो, ग्रंथ संतोष सुरतरु (सटीक), कन्हड्दास वाणी, सूफी दरवेश बाबा शेख फरीद जीवन और वाणी (सटीक), कान्हां-ग्रंथावली (सटीक), रज्जब की सरबंगी (सभूमिका), ब्रह्मदास (भगतराम शिष्य), वाणी (सटीक), मारवाड़ी दरियावसाहब जीवनी और वाणी, ब्रह्मदास (रामजन-शिष्य) वाणी राजस्थान में नरसी मेहता पर रचित साहित्य (नरसीजी रो माहेरो)। दो सौ से अधिक शोध-लेख विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित दो सौ से हो चुके हैं।

उन्हें अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय, प्रधानपीठ शाहपुरा; प्रधान पीठ दादूपंथ, नारायणा; मीरा स्मृति संस्थान, चित्तौड़गढ़ः साहित्य मंडल, नाथद्वारा और भारतीय विद्या मन्दिर, कोलकाता द्वारा सम्मानित किया थ गया है।

फिलहाल त्रैमासिक पत्र ‘श्रीरामस्नेही सन्देश’ के सम्पादक हैं और दिल्ली स्थित निजी प्रतिष्ठान में महाप्रबन्धक हैं। 

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