Facebook Pixel

Gorakh-Vijay

Edition: 2025, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Radhakrishna Prakashan
As low as ₹746.25 Regular Price ₹995.00
25% Off
In stock
SKU
Gorakh-Vijay

- +
Share:
Codicon

‘गोरख विजय' नाथपंथ के महान योगी गुरु गोरखनाथ से सम्बन्धित पुरातन बाग्रा काव्य ग्रन्थ ‘गोर्ख विजय’ का हिन्दी अनुवाद और समीक्षात्मक पर्यालोचन प्रस्तुत करनेवाली कृति है। गोरखनाथ ने अपने साधनामय जीवन और कल्याणमय दर्शन से तत्कालीन जन-समाज को अत्यन्त प्रभावित-प्रेरित किया था। उन्होंने द्वैताद्वैत-विलक्षण अद्वैतवाद का समर्थन किया लेकिन संसार को मिथ्या मानने से इनकार किया। उन्होंने मोक्ष का साधन योग को माना और योग को अष्टांग न मानकर षडंग माना। वस्तुतः यम-नियम को उन्होंने, साधक हो या सामान्य-जन, मनुष्य मात्र का कर्तव्य और दायित्व बताया जिनमें परिपक्वता के बाद ही आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि की सिद्धि सम्भव है। ऐसी अनेकानेक बातों को जानने-समझने के लिए ‘गोरख विजय’ एक अत्यन्य उपयोगी ग्रन्थ है।

प्रस्तुत पुस्तक का एक और उल्लेखनीय पक्ष यह है कि इसमें बंगाल के लोक समाज में प्रचलित गोरखनाथ सम्बन्धी कई लोकगाथाएँ और कुछ अन्य प्रासंगिक सामग्री भी दी गई हैं जिनसे गोरखपंथी साधना के नये आयाम खुलते हैं।

वस्तुतः साधक हो या साहित्यिक, विद्वान हो या सामान्य पाठक, गोरखनाथ में दिलचस्पी रखनेवाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए यह पुस्तक अवश्य पठनीय है। 

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 304p
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 2.5
Write Your Own Review
You're reviewing:Gorakh-Vijay
Your Rating
Brajendra Kumar Singhal

Author: Brajendra Kumar Singhal

ब्रजेन्द्रकुमार सिंहल

ब्रजेन्द्रकुमार सिंहल का जन्म 23 नवम्बर, 1956 को गंगापुर सिटी, जिला सवाईमाधोपुर, राजस्थान में हुआ। वे निर्गुणी सन्त-साहित्य, विशेषकर रामस्नेही सम्प्रदाय और दादूपन्ध सहित अनेक सन्त-भक्त सम्प्रदायों के साहित्य और इतिहास तथा प्राग्‌आधुनिक हिन्दी-साहित्य के अधिकारी विद्वान हैं। उन्होंने संस्कृत-साहित्य और सन्त-वाणियों और वेदान्त-ग्रंथों का विशेष अध्ययन किया है। उनकी 53 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। जिनमें प्रमुख हैं—श्रीरामचरण चरितामृत, श्रीसुरतराम चरितामृत, श्रीसुरतरामवाणी पूर्वार्द्ध (सटीक), श्रीरामप्रतापवाणी (पूर्वार्द्ध), रामस्नेही मत-सिद्धान्त-दर्पण (पूर्वार्द्ध), श्रीरामनिवास-वाणी, आचार्य हरिदास-वाणी, आचार्य हिम्मतराम ग्रन्थावली (सटीक), श्रीरामसेवकवाणी, श्रीपोहकरदास वाणी, श्रीमुरलीरामवाणी, श्रीजगनाथ-ग्रंथावली (सभूमिका), श्रीहरिराम-वाणी, मौरा-चरितामृत', वषनांवाणी (सटीक), टीला पदावली (सटीक), नाम-प्रतीत-भगतमाला (सटीक), नरसीजी रो मोहेरो, ग्रंथ संतोष सुरतरु (सटीक), कन्हड्दास वाणी, सूफी दरवेश बाबा शेख फरीद जीवन और वाणी (सटीक), कान्हां-ग्रंथावली (सटीक), रज्जब की सरबंगी (सभूमिका), ब्रह्मदास (भगतराम शिष्य), वाणी (सटीक), मारवाड़ी दरियावसाहब जीवनी और वाणी, ब्रह्मदास (रामजन-शिष्य) वाणी राजस्थान में नरसी मेहता पर रचित साहित्य (नरसीजी रो माहेरो)। दो सौ से अधिक शोध-लेख विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित दो सौ से हो चुके हैं।

उन्हें अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय, प्रधानपीठ शाहपुरा; प्रधान पीठ दादूपंथ, नारायणा; मीरा स्मृति संस्थान, चित्तौड़गढ़ः साहित्य मंडल, नाथद्वारा और भारतीय विद्या मन्दिर, कोलकाता द्वारा सम्मानित किया थ गया है।

फिलहाल त्रैमासिक पत्र ‘श्रीरामस्नेही सन्देश’ के सम्पादक हैं और दिल्ली स्थित निजी प्रतिष्ठान में महाप्रबन्धक हैं। 

Read More
Books by this Author
New Releases
Back to Top