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Lohe Ke Pankh

Edition: 2025, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Lohe Ke Pankh

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लोहे के पंख दलित समुदाय से आने वाले एक व्यक्ति की आपबीती के जरिये भारतीय किसान-मजदूरों के कठिन-कठोर जीवन-संघर्ष का जैसा ज़मीनी और विशद चित्र प्रस्तुत करता है, वैसा कम ही उपन्यासों में देखने को मिलता है। आज़ादी के पहले और बाद के लगभग तीन दशकों की पृष्ठभूमि में विन्यस्त और बिहार के ग्रामीण और शहरी समाज को समेटे यह उपन्यास तत्कालीन परिस्थितियों को अंकित करते हुए जिन सामाजिक-राजनीतिक विषमताओं को उजागर करता है वे आज भी समाप्त नहीं हुई हैं। सामन्ती वर्चस्व और अत्याचार, दलितों का शोषण-उत्पीड़न, राजनीतिक दलों की कथनी-करनी का अन्तर...आज भी आम हैं। ‘लोहे के पंख’ जिस समय—बीसवीं सदी के छठे दशक में—लिखा गया था उस समय हिन्दी साहित्य में दलित प्रश्न इतना केन्द्रीय और मुखर नहीं था। इस नजरिये से देखें तो हिमांशु श्रीवास्तव का एक दलित पात्र को अपने उपन्यास का नायक बनाकर उसके मुख से ही समय-समाज की पड़ताल कराना विशेष महत्व रखता है।

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 376p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 2
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Himanshu Shrivastava

Author: Himanshu Shrivastava

हिमांशु श्रीवास्तव

हिमांशु श्रीवास्तव का जन्म 11 मार्च, 1934 को दिघवारा अंचल के गाँव हराजी, ज़िला सारण, बिहार में हुआ था। उन्होंने मनोविज्ञान में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। पहली कहानी ‘कल्पना’ पत्रिका में छपी। पाँचवें दशक के प्रारम्भ से उपन्यासों का प्रकाशन शुरू हुआ। 1949 में प्रसिद्ध रेडियो नाटक ‘उमर खैयाम’ का आकाशवाणी द्वारा राष्ट्रीय प्रसारण हुआ।

उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—‘लोहे के पंख’, ‘नदी फिर बह चली’, ‘भित्तिचित्र की मयूरी’, ‘मन के वन में’, ‘दो आँखों की झील’, ‘कुहासे में जलती धूपबत्ती’, ‘रिहर्सल’, ‘परागतृष्णा’, ‘शोकसभा’, ‘प्रियाद्रोही’, ‘पुरुष और महापुरुष’, ‘पूरा अधूरा पुरुष’, ‘कथासूर्य की नई यात्रा’, ‘पैदल और कुहासा’, ‘नई सुबह की धूप’, ‘इशारा’, ‘न खुदा न सनम’ (उपन्यास); ‘जेलयात्रा’, ‘हंस चुगे सीप से ज्यों मोती’, ‘कथा सुन्दरी’, ‘मुखबिर होने का इरादा’ (कहानी-संग्रह); रेडियो नाटकों के तीन संग्रह और विपुल बाल-साहित्य भी प्रकाशित। उन्हें अनेक पुरस्कारों व सम्मानों से सम्मानित किया गया।

26 मई, 1996 को पटना में उनका निधन हुआ।

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