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Khel Khel Mein Beeta Jeevan

Author: Girish Karnad
Translator: Usharani Rao
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Radhakrishna Prakashan
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Khel Khel Mein Beeta Jeevan

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गिरीश कारनाड आधुनिक भारत की महानतम सांस्कृतिक हस्तियों में से एक थे—एक कुशल अभिनेता, लीक से हटकर काम करने वाले निर्देशक, नवोन्मेषकारी प्रशासक, साफ़ सोच के धनी विचारक और एक असाधारण नाटककार। सार्वजनिक भारतीय सांस्कृतिक परिदृश्य में वे एक ऐसे बुद्धिजीवी के रूप में जाने जाते रहे जिनका नैतिक कम्पास कभी नहीं डिगा।
‘खेल-खेल में बीता जीवन’ में वे अपने जीवन के पूर्वार्द्ध का वर्णन करते हैं। सिरसी में अपने बचपन और स्थानीय थिएटर से शुरुआती जुड़ाव से लेकर, धारवाड़, बॉम्बे और ऑक्सफ़ोर्ड में अपनी शिक्षा, पब्लिशिंग में अपने करियर, फ़िल्म इंडस्ट्री में अपनी सफलताओं और मुश्किलों, और अपने निजी और लेखकीय जीवन के बारे में वे इसमें बहुत गहरी संलग्नता के साथ लिखते हैं।
भावप्रवण और दिलचस्प, गहरी समझ वाली और बेबाक, उनकी ये यादें एक महान जीनियस के जीवन को आकार देने वाले अनुभवों का अविस्मरणीय ख़ाका खींचती हैं। इसमें उस भारत की भी एक अनोखी झलक हमें मिलती है जिसमें वे रहते थे और काम करते थे।
अपने सहपाठियों, सहकर्मियों, दोस्तों, साथी लेखकों-निर्देशकों और अन्य कला व्यक्तित्वों के बारे में भी उन्होंने इसमें गहन अन्तदृष्टि के साथ लिखा है, जिससे हमें उस दौर के सांस्कृतिक और सामाजिक परिवेश से अवगत होने का अवसर मिलता है।

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Usharani Rao
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 320p
Publisher Radhakrishna Prakashan
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Girish Karnad

Author: Girish Karnad

गिरीश कारनाड

1938, माथेरान, महाराष्ट्र में जन्मे गिरीश कारनाड की मातृभाषा कन्नड़ है। गणित की सर्वोच्च परीक्षा में सफल होकर ‘रोड्स स्कॉलर’ के रूप में ऑक्सफ़ोर्ड गए।

1963 में ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, मद्रास में नौकरी। 1970 में ‘भाषा फ़ेलोशिप’, नौकरी से त्याग-पत्र और स्वतंत्र लेखन की शुरुआत। पहला नाटक 'ययाति' 1968 में छपा और चर्चा का विषय बना। 'तुगलक' के लेखन-प्रकाशन और बहुभाषी अनुवादों-प्रदर्शनों से राष्ट्रीय स्तर के नाटककार के रूप में प्रतिष्ठा। 1971 में 'हयवदन' का प्रकाशन, अभिमंचन। 2015 में 'बलि'; 2017 में 'शादी का एलबम', 'बिखरे बिम्ब और पुष्प'; 2018 में

'टीपू सुल्तान के ख्वाब' का प्रकाशन। पूना के फ़िल्म संस्थान में प्रधानाचार्य, त्याग-पत्र और इस नए सशक्त अभिव्यक्ति-माध्यम के प्रति दिलचस्पी। सन् 1988 से कुछ वर्ष पहले तक ‘संगीत नाटक अकादेमी’, नई दिल्ली के अध्यक्ष रहे।

‘संस्कार’, ‘वंशवृक्ष’, ‘काड़ू’, ‘अंकुर’, ‘निशान्त’, ‘स्वामी’ और 'गोधूलि' जैसी राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत एवं प्रशंसित फ़‍िल्मों में अभिनय-निर्देशन। 'मृच्छकटिक' पर आधारित फ़‍िल्मालेख, 'उत्सव' के लेखक-निर्देशक तथा एक लोकप्रिय दूरदर्शन धारावाहिक के महत्त्वपूर्ण अभिनेता के रूप में बहुचर्चित।

सम्मान : ‘तुगलक’ के लिए ‘संगीत नाटक अकादेमी पुरस्कार’, 'हयवदन' के लिए ‘कमलादेवी चट्टोपाध्याय पुरस्कार’, 'रक्त कल्याण' के लिए ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’ तथा साहित्य में समग्र योगदान के लिए ‘भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार’।

निधन : 10 जून, 2019

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