राकेश तिवारी, रॉकी का जन्म 2 अक्टूबर, 1953 को सीतापुर ज़िले के बिसवाँ गाँव में हुआ। वैसे ये मूल निवासी उत्तर-प्रदेश के बस्ती ज़िला के हैं। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्त्व विषय में स्नातकोत्तर, मिर्ज़ापुर के चित्रित शैलाश्रयों पर अवध विश्वविद्यालय से पीएच.डी.। लगभग चार दशक तक देश के विभिन्न भागों में पुरातात्त्विक सर्वेक्षण एवं उत्खनन तथा गंगा-घाटी को दक्षिण भारत से जोड़नेवाले प्राचीन ‘दक्षिणा-पथ’ की यात्रा एवं गहन अध्ययन। कई देशों की यात्राएँ।
प्रकाशित कृतियाँ—लखनऊ से काठमांडू तक साइकिल से नेपाल की यात्रा पर आधारित ‘पहियों के इर्द-गिर्द’, दिल्ली से कलकत्ता तक की नौका-यात्रा पर आधारित यात्रा-वृत्तान्त ‘सफ़र एक डोंगी में डगमग’, उत्तर प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी भू-भाग (ज़िला–मिर्ज़ापुर, सोनभद्र और चंदौली) के सर्वेक्षण एवं सैर पर आधारित संस्मरण ‘पवन ऐसा डोलै’, चिली एवं टर्की की यात्राओं पर आधारित यात्रा विवरण ‘पहलू में आए ओर-छोर : दो देश : चिली और टर्की’। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में हिमालय, अफ़ग़ानिस्तान, मॉरीशस के यात्रा-संस्मरण, कविताएँ आदि प्रकाशित।
महानिदेशक, भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के पद से सेवानिवृत्त।