‘जीवन ऐसा हो’ राजेश माहेश्वरी का महत्त्वपूर्ण कविता-संग्रह है। इस संग्रह की कविताएँ पढ़कर स्पष्ट होता है कि राजेश माहेश्वरी जीवन के विशाल उपवन से अनुभवों के फूल और शूल संचित करते रहे हैं। फूल की सुरभि और शूल की चुभन इन कविताओं में सहज रूप से समाहित है। लक्ष्य है, हृदय को भावना-सम्पन्न और बुद्धि को विवेक-सम्मत बनाना।

कवि जब समाज में व्याप्त कदाचार, अन्याय और आलस्य देखता है तो उसकी कविता में दु:ख, आक्रोश और व्यंग्य घुल जाता है। वह कह उठता है—‘ग़रीब और शोषित जहाँ था/वहीं रहकर/आज भी शोषित है/और क्रान्ति की प्रतीक्षा में/प्रतिदिन ढह रहा है।’

उदात्त मानवतावाद ही राजेश माहेश्वरी का लक्ष्य है।

इन कविताओं में आस्था और विश्वास का बहुरंगी संसार है। अध्यात्म की धूपछाँह है। उद्देश्य यही है कि जीवन तुच्छताओं से मुक्त हो और परम गन्तव्य तक पहुँचे। मंगलकामना की शैली में कवि कह उठता है—

‘‘सागर से गहरी हो

प्रेम व त्याग की प्यास।

श्रम व कर्म के प्रति

हो हमारा समर्पण।।’’

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2013
Edition Year 2013, Ed. 1st
Pages 128p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 1
Write Your Own Review
You're reviewing:Jeevan Aisa Ho
Your Rating
Rajesh Maheshwari

Author: Rajesh Maheshwari

राजेश माहेश्वरी

31 जुलाई, 1954 को जन्मे राजेश जी वर्तमान में परपैक्ट ग्रुप ऑफ़ इंडस्ट्रीज तथा साउथ एवेन्यू मॉल के डायरेक्टर हैं। आप सेठ मन्नूलाल जगन्नाथदास चेरिटेबल हॉस्पिटल एंड रिसर्च इंस्टि‍ट्यूट, पद्मराज चेरिटेबल ट्रस्ट तथा भारतीय कला संगम ट्रस्ट के ट्रस्टी हैं। आप जबलपुर चेम्बर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के पूर्व अध्यक्ष और पैट्रन मेम्बर हैं एवं एलायन्स क्लब इंटरनेशनल के अन्तरराष्ट्रीय निदेशक हैं।

आपने अमेरिका, चीन, जापान, जर्मनी, फ़्रांस, इंग्लैंड, बेल्जियम, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड, हांगकांग, मकाऊ, थाइलैंड और मलेशिया सहित विभिन्न देशों का भ्रमण किया है।

ई-मेल : mrityubodh@gmail.com

 

Read More
Books by this Author
New Releases
Back to Top