Ishq Mein Maati Sona

Fiction : Stories,Laprek
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Ishq Mein Maati Sona
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प्रेम में होना सिर्फ़ हाथ थामने का बहाना ढूँढ़ना नहीं होता। दो लोगों के उस स्पेस में बहुत कुछ टकराता रहता है। लप्रेक उसी कशिश और टकराहट की पैदाइश है।    

–रवीश कुमार

गिरीन्द्र नाथ झा के लेखन में शहर और गाँव दोनों अपनी वास्तविकता में एक साथ दिखाई देते हैं। 21वीं सदी में जिस तरह वे आंचलिक जीवन की कथा कहते हैं, वह रेणु की परम्परा को आगे बढ़ानेवाला है। रेणु के उपन्यास ‘मैला आँचल’ के मेरीगंज की तरह गिरीन्द्र का गाँव चनका भी इस किताब में पूरी तरह दिखाई पड़ता है।    

– इयान वुल्फ़ोर्ड, ‘द हिन्दू’

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Language Hindi
Format Paper Back
Publication Year 2018
Edition Year 2018, Ed. 2nd
Pages 88p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Sarthak (An imprint of Rajkamal Prakashan)
Dimensions 17.5 X 12 X 1
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Editorial Review

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Girindra Nath Jha

Author: Girindra Nath Jha

गिरीन्द्र नाथ झा

पाँच साल से भी ज्‍़यादा समय देश के प्रतिष्ठित न्यूज़ चैनलों में घटना को ख़बर की शक्ल देने के बाद अब बिहार के अपने गाँव में नए ढंग-ढर्रे से खेती-किसानी और अपने ब्लॉग अनुभव पर लेखन। दिल्ली विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में ग्रेजुएट। वाईएमसीए से पत्रकारिता में डिप्लोमा। इसी कड़ी में सीएसडीएस-सराय की फ़ैलोशिप पर प्रवासी इलाक़ों में टेलीफ़ोन बूथ पर रिसर्च। लप्रेक लेखन में ग्रामीण भारत के रंग भरनेवाले, फणीश्वरनाथ रेणु की भाषा की ख़ुशबू रचनेवाले अनुभूत शैलीकार।

 

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