Facebook Pixel

Hindi Kahani Ka Itihas : Vol. 1 (1900-1950)-Paper Back

Author: Gopal Ray
ISBN: 9788126720132
Edition: 2023, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
Special Price ₹449.10 Regular Price ₹499.00
10% Off
In stock
SKU
9788126720132
- +
Share:
Codicon

यह हिन्दी कहानी का पहला व्यवस्थित इतिहास है और हिन्दी-उर्दू का पहला समेकित इतिहास तो यह है ही। उल्लेखनीय है कि इस अवधि के अनेक कहानीकार एक साथ हिन्दी और उर्दू दोनों भाषाओं में लिख रहे थे। इनमें प्रेमचन्द प्रमुख हैं। इसके अलावा सुदर्शन, उपेन्द्रनाथ अश्क आदि भी उर्दू और हिन्दी में साथ-साथ लिख रहे थे। इनकी हिन्दी और उर्दू में भी, लिपि को छोड़कर, कोई विशेष अन्तर नहीं है। कथ्य और संरचना में, भाषिक आधार पर तो, कोई अन्तर है ही नहीं। उर्दू की अधिकतर उल्लेखनीय कहानियाँ हिन्दी में रूपान्तरित या देवनागरी में लिप्यन्तरित भी हो चुकी हैं। ...उर्दू कहानियों पर अधिकतर सामग्री उर्दू साहित्य के इतिहास-ग्रन्थों और आलोचना-पुस्तकों से ली गई है, और यथास्थान उनका सन्दर्भ भी दे दिया गया है। इस किताब में हिन्दी और उर्दू के साथ-साथ भोजपुरी, मैथिली और राजस्थानी के कहानी-साहित्य को भी स्थान दिया गया है। इस पुस्तक में जिस अवधि के कहानी-साहित्य का इतिहास प्रस्तुत किया गया है, उस अवधि में अहिन्दीभाषियों और प्रवासी भारतीयों द्वारा लिखित कहानी-साहित्य का कोई सुनियोजित विवरण उपलब्ध नहीं है। इस कारण उस विशाल, और कदाचित् मूल्यवान, साहित्य को इस ‘इतिहास’ में स्थान देना सम्भव नहीं हो सका है।

इस किताब में उर्दू-हिन्दी और मैथिली-भोजपुरी-राजस्थानी के लगभग 100 कहानी-लेखकों और 3000 कहानियों का कमोबेश विस्तार के साथ विवेचन या उल्लेख किया गया है। कहानी-लेखकों और कहानी-संग्रहों की अक्षरानुक्रम सूची अनुक्रमणिका में दे दी गई है। इसके साथ ही जो कहानियाँ किसी भी कारण चर्चित रही हैं, या उल्लेखनीय हैं, उनकी अक्षरानुसार सूची भी उपलब्ध करा दी गई है। आशा है, इससे पाठकों की जिज्ञासाओं की तुष्टि हो सकेगी।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2023
Edition Year 2023, Ed. 1st
Pages 480p
Price ₹499.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 3
Write Your Own Review
You're reviewing:Hindi Kahani Ka Itihas : Vol. 1 (1900-1950)-Paper Back
Your Rating
Gopal Ray

Author: Gopal Ray

गोपाल राय

गोपाल राय का जन्म 13 जुलाई, 1932 को बक्सर, बिहार के गाँव चुन्नी में हुआ था। उनकी आरम्भिक शिक्षा गाँव और निकटस्थ कस्बे के स्कूल में हुई। उन्होंने हिन्दी विभाग, पटना विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर किया। पटना विश्वविद्यालय से ही 1964 में ‘हिन्दी कथा साहित्य और उसके विकास पर पाठकों की रुचि का प्रभाव’ विषय पर डी.लिट. की उपाधि प्राप्त की। 21 फरवरी, 1957 को पटना विश्वविद्यालय, पटना में हिन्दी प्राध्यापक के रूप में उनकी नियुक्ति हुई जहाँ से 4 दिसम्बर, 1992 को सेवानिवृत्त हुए।

उनकी प्रमुख पुस्तकें हैं—‘हिन्दी कथा साहित्य और उसके विकास पर पाठकों की रुचि का प्रभाव’, ‘हिन्दी उपन्यास कोश’ (दो खंडों में), ‘उपन्यास का शिल्प’, ‘अज्ञेय और उनके उपन्यास’, ‘हिन्दी भाषा का विकास’, ‘हिन्दी कहानी का इतिहास’ (तीन खंडों में), ‘उपन्यास की पहचान श्रृंखला’ के अन्तर्गत—‘शेखर : एक जीवनी’, ‘गोदान : नया परिप्रेक्ष्य’, ‘रंगभूमि : पुनर्मूल्यांकन’, ‘मैला आँचल’, ‘दिव्या’, ‘महाभोज’, ‘हिन्दी उपन्यास का इतिहास’, ‘उपन्यास की संरचना’, ‘अज्ञेय और उनका कथा-साहित्य’। उन्होंने पं. गौरीदत्त कृत ‘देवरानी-जेठानी की कहानी’, ‘राष्ट्रकवि दिनकर’ का सम्पादन किया। कई वर्षों तक समीक्षा पत्रिका का सम्पादन-प्रकाशन भी किया।

25 सितम्बर, 2015 को उनका निधन हुआ। 

Read More
Books by this Author
New Releases
Back to Top