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Hauz Mein Chand

Author: Ali Akbar Natik
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Radhakrishna Prakashan
As low as ₹149.25 Regular Price ₹199.00
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Hauz Mein Chand

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अली अकबर नातिक़ की नज़्म जितनी मुनफ़रिद और बाँकी है, उतनी ही उनकी ग़ज़ल में ताज़गी और नुदरत है। वह एक ऐसे अदीब हैं जो एक ही समय में नस्र और नज़्म पर एक जैसी क़ुदरत रखते हैं। ग़ज़ल में उनका रुझान ज़्यादातर फ़ितरत से फूटने वाली सुन्दरता की उन निशानियों को क़ैद करने की तरफ़ है, जिन पर अक्सर शायरों का ध्यान नहीं जाता। ज़बान का असर उनके यहाँ जादुई तरकीबों और नित-नए इस्तिआरों की दुनिया आबाद करता हुआ नज़र आता है। वह अपनी ग़ज़ल से कम पहचाने गए हैं, और उनके पढ़ने वालों के लिए ये एक ऐसा ज़ाविया है, जिस पर ध्यान दिए बिना आप अली अकबर नातिक़ की तख़्लीक़ी दुनिया का सुराग़ ठीक-ठीक नहीं लगा सकते। वह अपनी ग़ज़लों में निहायत मुश्किल और पथरीली ज़मीनों पर चलते हुए फ़िक्र और बयान के ऐसे ख़ूबसूरत फूल खिलाने का हुनर जानते हैं कि पढ़ते हुए उनके हुनर पर हज़ार हैरत होती है। उर्दू शायरी के मुआसिर शायरों में अली अकबर नातिक़ पहले भी किसी तार्रुफ़ के मोहताज नहीं रहे हैं, मगर ये किताब उनकी तारीफ़ के एक नए पहलू से पढ़ने वालों को रू-शनास कराती चलती है।

 

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Language Hindi
Binding Paper Back
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 96p
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1
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Ali Akbar Natik

Author: Ali Akbar Natik

अली अकबर नातिक़

अली अकबर नातिक़ का जन्म पाकिस्तान के शहर ओकाड़ा में 1977 में हुआ। नातिक़ ने ग़रीबी और परेशानी के सबब पन्द्रह साल तक राजमिस्त्री के तौर पर भी काम किया। इसी दौरान उन्होंने आज़ादाना तौर पर अपनी तालीम का सिलसिला भी जारी रखा। अली अकबर नातिक़ की अब तक प्रकाशित किताबों में ‘बे-यक़ीन बस्तियों में’, ‘याक़ूत के वरक़’ और ‘सुर मंडल का राजा’ नज़्मों के मजमूए हैं और ‘क़ायम दीन’ और ‘शाह मुहम्मद का तांगा’ कहानियों की किताबें हैं। इसके साथ ही ‘नौ लखी कोठी’, ‘कमारी वाला’ और ‘कूफ़ा के मुसाफ़िर’ जैसे उपन्यास भी मंज़र-ए-आम पर आ चुके हैं। उनकी ग़ज़लों की किताब ‘सब्ज़ बस्तियों के ग़ज़ाल’ के नाम से उर्दू में प्रकाशित हुई है। इन सब किताबों के साथ उनकी आपबीती ‘आबाद हुए, बर्बाद हुए’ के नाम से पिछले वर्षों में सामने आई और उर्दू के महान लेखक मौलाना मुहम्मद हुसैन आज़ाद पर उनकी किताब ‘फ़क़ीर बस्ती में था’ अपने अनोखे नस्री अन्दाज़ की वजह से काफ़ी मशहूर हुई। इस तरह देखा जाए तो अली अकबर नातिक़ आज के दौर के ऐसे क़लमकार हैं, जिन्होंने नज़्म और नस्र की मुख़्तलिफ़ विधाओं में लगातार काम किया और आज भी कर रहे हैं।

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