अली अकबर नातिक़ की नज़्म जितनी मुनफ़रिद और बाँकी है, उतनी ही उनकी ग़ज़ल में ताज़गी और नुदरत है। वह एक ऐसे अदीब हैं जो एक ही समय में नस्र और नज़्म पर एक जैसी क़ुदरत रखते हैं। ग़ज़ल में उनका रुझान ज़्यादातर फ़ितरत से फूटने वाली सुन्दरता की उन निशानियों को क़ैद करने की तरफ़ है, जिन पर अक्सर शायरों का ध्यान नहीं जाता। ज़बान का असर उनके यहाँ जादुई तरकीबों और नित-नए इस्तिआरों की दुनिया आबाद करता हुआ नज़र आता है। वह अपनी ग़ज़ल से कम पहचाने गए हैं, और उनके पढ़ने वालों के लिए ये एक ऐसा ज़ाविया है, जिस पर ध्यान दिए बिना आप अली अकबर नातिक़ की तख़्लीक़ी दुनिया का सुराग़ ठीक-ठीक नहीं लगा सकते। वह अपनी ग़ज़लों में निहायत मुश्किल और पथरीली ज़मीनों पर चलते हुए फ़िक्र और बयान के ऐसे ख़ूबसूरत फूल खिलाने का हुनर जानते हैं कि पढ़ते हुए उनके हुनर पर हज़ार हैरत होती है। उर्दू शायरी के मुआसिर शायरों में अली अकबर नातिक़ पहले भी किसी तार्रुफ़ के मोहताज नहीं रहे हैं, मगर ये किताब उनकी तारीफ़ के एक नए पहलू से पढ़ने वालों को रू-शनास कराती चलती है।
| Language | Hindi |
|---|---|
| Binding | Paper Back |
| Editor | Not Selected |
| Publication Year | 2026 |
| Edition Year | 2026, Ed. 1st |
| Pages | 96p |
| Publisher | Radhakrishna Prakashan |
| Dimensions | 21.5 X 14 X 1 |