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Sire Se Kharij

Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Lokbharti Prakashan
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Sire Se Kharij

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त्रासदी जब जीवन में रोजमर्रा का हिस्सा बन जाती तो वह प्रहसन बन जाती है। दुःख की सघनता करुणा या क्रोध की जगह एक निर्मम हँसी के शिल्प में व्यक्त होती है। व्यंग्य का सम्बन्ध विनोद से नहीं गहरी करुणा से जुड़ा होता है। हरिशंकर परसाई की परम्परा और श्रीलाल शुक्ल की पाठशाला के सिद्ध और प्रसिद्ध व्यंग्यकार अनूप मणि त्रिपाठी की रचनाओं का मूल स्वभाव यही है।

एक ऐसे समय में जब लगातार बदरूप होता जा रहा यथार्थ असम्भव कल्पनाओं का भी अतिक्रमण करता जा रहा है तब चित्रण की पुरानी और प्रचलित यथार्थवादी शैली आज के यथार्थ को पकड़ने में नाकाफी होने लगी है। इसी वजह से कविता में फैन्टेसी और बिम्बों का चलन बढ़ा और गद्य का स्वभाव व्यंग्यात्मक होता जा रहा है।

‘सिरे से ख़ारिज’ संग्रह आज की राजनीतिक, सामाजिक (और साहित्यिक भी) विडम्बनाओं पर लेखक की गहरी प्रतिक्रिया और तीखी टिप्पणी के रूप में हमेशा दर्ज किया जाएगा। भले ही लेखक ने रावण की कल्पित कहानियाँ लिखी हैं, लेकिन वह कल्पित रावण की सच्ची कहानियों के रूप में पढ़ी जाएँगी। तब लोग पाएँगे कि इस आर्यावर्त में राजा के प्रेम-पत्र का आलम्बन भारत माता नहीं, सूखे काठ की ठूँठ कुर्सी रही है।

'सिरे से ख़ारिज' के इन वाकयात की असली ताकत यह है कि किताब के हाथ में होने तक ये आपको गुदगुदाएँगे और जब आप पढ़कर किताब को रख देंगे तो धीरे-धीरे अपने आगोश में जकड़ते चले जाएँगे।

—देवेन्द्र 

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 168p
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 20 X 13 X 1
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Anoop Mani Tripathi

Author: Anoop Mani Tripathi

अनूप मणि त्रिपाठी

अनूप मणि त्रिपाठी का जन्म 23 जून, 1976 को उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले के धानी नामक गाँव में हुआ। वे लखनऊ विश्वविद्यालय से मध्यकालीन एवं आधुनिक भारतीय इतिहास में परास्नातक हैं। उनकी प्रकाशित पुस्तकें हैं—‘शोरूम में जननायक’, ‘अस मानुष की जात’, ‘नया राजा नये क़िस्से’ और ‘साँपों की सभा’। उनकी कहानी ‘झुलना’ पर गोरखपुर दूरदर्शन द्वारा टेली फिल्म का निर्माण एवं प्रसारण हुआ है। ‘राजा बहोत चिन्तित है’ तथा ‘बन्धक आजादी’ आदि व्यंग्य रचनाओं पर नुक्कड़ नाटक खेले गए। अमर उजाला द्वारा हिन्दी दिवस पर आयोजित अखिल भारतीय लघु फिल्म प्रतियोगिता में उनकी लिखी स्क्रिप्ट ‘हिन्दी माथे की बिन्दी’ को प्रथम पुरस्कार मिला। कथा समवेत पत्रिका की अखिल भारतीय कहानी प्रतियोगिता में ‘कफन : आगे की कहानी’ को द्वितीय स्थान मिला। कथादेश पत्रिका की अखिल भारतीय लघुकथा प्रतियोगिता में उनकी कथा ‘डमी’ ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। तहलका पत्रिका में ‘तहलका फुल्का’ नामक व्यंग्य-स्तम्भ ने बड़े पैमाने पर लोगों का ध्यान खींचा।

वे ‘अंजुमन नवलेखन पुरस्कार’ (2016), ‘प्रथम के.पी. सक्सेना युवा सम्मान’ (2017), ‘सफ़दर हाशमी शब्द शिल्पी सम्मान’ (2021), ‘हरिशंकर परसाई स्मृति इप्टा व्यंग्य सम्मान’ (2023), ‘व्यंग्य यात्रा रवीन्द्रनाथ त्यागी स्मृति सोपान सम्मान’ (2024) और ‘हरिशंकर परसाई व्यंग्य सम्मान’ (2024) से सम्मानित हैं।

ई-मेल : [email protected]

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