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Yaad Ka Chehra

Translator: Anuradha Sharma
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Yaad Ka Chehra

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अम्बरीन हसीब अम्बर की शायरी में एक अलग तरह का फ़िक्री जहान नज़र आता है। वह एक तरफ़ हुस्न की जानिब से शायरी में अपना मुक़द्दमा पेश करती नज़र आती हैं और नाज़ और अदा कही जाने वाली महबूबा की ज़िन्दगी के असली मसलों से हमें रू-ब-रू करवाती हैं तो वहीं दूसरी तरफ़ वह इतिहास की धूल में दफ़नाई हुई औरत के सवालों को भी दौर-ए-हाज़िर के दामन पर सब्त करती हुई मालूम होती हैं। ‘याद का चेहरा’ ग़ज़ल और नज़्म का एक ऐसा गुलदस्ता है जिसमें सिर्फ़ तख़य्युल के फूल ही नहीं हैं, बल्कि आज की औरत के चुभते हुए तंज़ के काँटे भी हैं। वह ज़ुल्म और जब्र से आँखों में आँखें डाल कर मुकालमा करने की रवादार हैं। मोहब्बत में भी वह अगर एक तरफ़ ईसार और क़ुर्बानी के जज़्बे को अहम तस्लीम करती हैं तो वहीं अपना हक़ माँगने से भी पीछे नहीं हटती हैं। वफ़ा उनके लिए मर्द को तन्हाई से जहान-ए-रंगीं तक लाती है, मगर ख़ुद के जहान-ए-रंगीं से तन्हाई तक पहुँचने को नज़रअन्दाज़ नहीं करती। उनकी शायरी की इस ख़ूबसूरत किताब को उन्हीं के अल्फ़ाज़ में कुछ यूँ पेश किया जा सकता है—

 

                    तंज़ रुसवाई सितम शिकवे गिले

                    हैं यही शायद वफ़ाओं के सिले

                    मुझको दुनिया की नहीं है आरज़ू

                    मेरे होने की ख़बर मुझको मिले

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Anuradha Sharma
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 112p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1
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Ambareen Haseeb Ambar

Author: Ambareen Haseeb Ambar

अम्बरीन हसीब अम्बर

अम्बरीन हसीब अम्बर का तअल्लुक़ कराची, पाकिस्तान से है। वह 1981 में पैदा हुईं। अदब और शायरी उन्हें विरासत में मिली, उनके वालिद प्रोफ़ेसर सहर अंसारी उर्दू के एक अहम शायर और अदीब हैं। अम्बरीन हसीब अम्बर के अभी तक दो शेरी मजमूए ‘दिल के उफ़ुक़ पर’ (2012) और ‘तुम भी ना’ (2020) प्रकाशित हो चुके हैं। उनकी शायरी उर्दू दुनिया में एक औरत की मोहब्बत, बग़ावत और अहमियत को अलफ़ाज़ देती हुई मालूम होती है। यही वजह है कि कम वक़्त में ही उन्होंने मुशायरों में अपने इस अनोखे उस्लूब और बेबाक अन्दाज़ से एक ख़ास जगह बनाई है। अम्बरीन एक बा-कमाल, हुनरमन्द और सच्चे जज़्बों की तर्जुमानी में माहिर शायर हैं, जिन्होंने उर्दू ग़ज़ल में तवाना उर्दू शायरी की रिवायत में एक और मुनफ़रिद लहजे का इज़ाफ़ा किया है। ‘याद का चेहरा’ उनके पहले शेरी मजमूए ‘दिल के उफ़ुक़ पर’ का देवनागरी लिप्यंतरण है।

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