Facebook Pixel

Chabi, Ghar Aur Andhera

Author: Jyoti Chawla
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Radhakrishna Prakashan
As low as ₹224.25 Regular Price ₹299.00
25% Off
In stock
SKU
Chabi, Ghar Aur Andhera

- +
Share:
Codicon

ज्योति चावला की कहानियों के विषय का रेंज इतना अधिक है कि एक तरफ विभाजन और 1984 के दंगों का दंश झेल चुके समुदाय हैं तो दूसरी तरफ बिहार के ग्रामीण परिवेश में यातना झेल रही स्त्रियाँ। एक तीसरा पक्ष महानगरीय जीवन भी है, वह जीवन जहाँ अकेलापन और अजनबीयत मनुष्य के जीवन का स्थायी त्रास बन चुका है। इस संग्रह में ‘चाबी, घर और अँधेरा’ और ‘लाजो’ कहानियाँ सिख समुदाय के दर्द को बयाँ करती हैं। दंगों का दंश कभी खत्म नहीं होता है। वह अलग-अलग रूपों में बार-बार जीवन पर आक्रमण करता है। ‘लाजो’ इस बात का प्रमाण है कि दंगों का दंश सबसे अधिक स्त्री झेलती है।

ज्योति की कहानियों में स्त्री पात्रों के अलग-अलग शेड्स हैं। वे अपनी निर्मिति में लेखक का साथ पाकर जीवन्त हो उठती हैं। यहाँ विषय को चुनने की एक बारीक निगाह और समझ है। यहाँ एक सुखी-सम्पन्न परिवार में भी एक स्त्री के दुख को परखा गया है। यहाँ अपने समय की धड़कन भी है और अपने समय का संघर्ष भी। ये कहानियाँ अपनी भाषा-शैली में कवितापन लिये हुए हैं। ‘सप्तपर्णी’ तथा ‘यह धुँआ-सा कहाँ से उठता है’ जैसी कहानियाँ जहाँ एक ओर शहरी और पारिवारिक अजनबीपन व अकेलेपन की उपज हैं वहीं शिल्प की दृष्टि से दोनों ही कहानियाँ बेहद काव्यात्मक हैं। भाषा में बसी लय के साथ ये कहानियाँ अपनी कथावस्तु में और मार्मिक हो जाती हैं। कुल मिलाकर ये कहानियाँ और इन कहानियों के पात्र अपनी व्यथा में पाठक को साथ लिये चलती हैं। 

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 216p
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 20 X 13 X 1.5
Write Your Own Review
You're reviewing:Chabi, Ghar Aur Andhera
Your Rating
Jyoti Chawla

Author: Jyoti Chawla

ज्योति चावला

5 अक्टूबर, 1979 को दिल्ली में जन्मी ज्योति चावला कविता और कहानी-लेखन में समान रूप से सक्रिय हैं।

उनकी प्रकाशित पुस्तकें हैं— ‘माँ का जवान चेहरा’, ‘जैसे कोई उदास लौट जाए दरवाजे से’, ‘यह उनींदी रातों का समय है’ (कविता-संग्रह); ‘अँधेरे की कोई शक्ल नहीं होती’ (कहानी-संग्रह) और ‘कथा, अन्तर्कथा, अन्तर्पाठ’ (आलोचना)। अनेक कविताएँ विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनूदित होकर प्रकाशित हो चुकी हैं।

कविता के लिए ‘शीला सिद्धान्तकर स्मृति कविता सम्मान’ और ‘जे.सी. जोशी स्मृति पाखी कविता सम्मान’ से सम्मानित ज्योति वर्तमान में इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू), दिल्ली में अध्यापक हैं।

ई-मेल : [email protected]

Read More
Books by this Author
New Releases
Back to Top