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Dakshin Bharat ke Sant

Author: Dr. C.L. Sonkar
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Lokbharti Prakashan
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Dakshin Bharat ke Sant

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इस कृति के माध्यम से दक्षिण भारत के अहिन्दी भाषी राज्यों यथा आन्ध्र प्रदेश व तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु व महाराष्ट्र के संक्षिप्त इतिहास के साथ उन 167 प्रमुख सन्तों, कवियों व महापुरुषों की साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक चिन्तन व उनके उपलब्ध चित्रों की धरोहर को राजभाषा हिन्दी के पाठकों के अध्ययन हेतु उपलब्ध कराने की दिशा में एक प्रयास है; जिन्होंने मानवीय एकता एवं समरसता के उत्थान के लिए जीवनयात्रा में शीर्ष में पहुँचकर अनुपम साहित्य का सृजन किया। इन महापुरुषों को नियन्त्रित करने के लिए सत्तासीन व वर्चस्ववादी समाज ने तरह-तरह के उत्पीड़न किये फिर भी उन्होंने हार नही मानी और कुछ ने तो अपने प्राणों की आहुति भी दे दी।

मुख्यतः संरचनात्मक धारणाओं के माध्यम से साहित्य के द्वारा समाज का विकास होता है। हर महान साहित्य रचना या कलाकृति एक प्रकार की सामूहिक दृष्टि को अभिव्यक्त करती है। यह दृष्टि एक समवेक समूह के रूप में मन की उपज है, जो लोक-साधक संतों, कवियों या चिंतकों के मनःपटल में उत्कर्ष के अंतिम सोपान पर पहुँच जाती है। संतों के काव्य के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि यह उनकी विचारधारा निर्गुण-ज्ञानमार्गी तथा सगुण-भक्तिमार्गी प्रेमभावना की ओर ले जाती है। उसे हम वस्तुतः एक वैश्विक दृष्टिकोण की संतुष्टि की ओर ले जाने के लिए सतत् प्रयत्नशील रहते हैं। 'दक्षिण भारत के सन्त' कृति में वैचारिक संवेदना के अन्तर्गत संत-कवियों की तद्समय की लोक-भावना यथा धर्म, नीति, मजहब, दर्शन, शील, प्रज्ञा व समाज की अनेकता में एकता दिखाने का प्रयास किया गया है। अशोक के 'छठवें शिलालेख' में कहा गया है कि ""मैं कितना ही परिश्रम करूँ और कितना ही राजकार्य करूँ, मुझे संतोष नहीं होता.... जो कुछ परिश्रम मैं करता हूँ, वह इसलिए कि प्राणियों के प्रति जो मेरा ऋण है, उससे उऋण हो जाऊँ।""

सी.एल. सोनकर

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 464p
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 2.5
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Author: Dr. C.L. Sonkar

डॉ. सी.एल. सोनकर

प्रारम्भिक शिक्षा-दीक्षा राष्ट्रकवि सोहनलाल द्विवेदी की मातृभूमि तहसील बिन्दकी के निकट ग्राम जैनपुर, पोस्ट जाफराबाद, जिला फतेहपुर, उत्तर प्रदेश में हुई। उच्च शिक्षा साहित्यरत्न में गद्य-पद्य साहित्य, भाषा विज्ञान, व्यवसाय प्रबन्धन के विषय, स्नातक व परास्नातक में दर्शनशास्त्र, राजनीतिशास्व, इतिहास व संस्कृति एवं पुरातत्त्व, विधि के विषय, पी-एच.डी. एवं डी.लिट. उपाधि के अध्ययनकाल में धर्म, नीति, दर्शन, प्रकृतिविज्ञान, समाजविज्ञान, अर्थव्यवस्था, मानवविज्ञान, खगोलशास्त्र, ज्योतिष, भू विज्ञान, प्राणिविज्ञान व जैव-विविधता तथा विश्व के अनेक दार्शनिकों एवं वैज्ञानिकों आदि का अध्ययन किया।
साहित्य सृजन-कार्यः उ.प्र. शासन की प्रशासनिक सेवा में रहते हुए यहाँ के ग्रामीण व शहरी परिवेश की प्रशासनिक, विकास सम्बन्धी, सामाजिक, आर्थिक, समुदायगत व अन्य जन-समस्याओं का समाधान कराने का अवसर मिला। अब तक भारत के सामाजिक इतिहास, सन्त साहित्य की प्रमुख कृतियों में लिखी गई सम्मतियों में मा. उच्चतम न्यायालय के जज़ श्रीमान् मार्कण्डेय काटजू, मा. उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति श्रीमान् रविन्द्र सिंह, न्यायमूर्ति श्रीमान् संजय मिश्रा, लोक आयुक्त उ.प्र., न्यायमूर्ति श्रीमान् अमरेश्वर प्रताप शाही, निदेशक राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी, भोपाल व भू.पू. मुख्य न्यायाधीश पटना एवं मद्रास उच्च न्यायालय, न्यायमूर्ति श्रीमान् अंजनी कुमार मिश्र एवं न्यायमूर्ति श्रीमान् जे. जे. मुनीर सहित कई देश-विदेश के विभिन्न विषय विशेषज्ञों व विद्वानों ने अपने अभिमत दिए हैं तथा विभिन्न विषयों पर अन्य पाँच पुस्तकें प्रकाशनाधीन हैं एवं लगभग चालीस से अधिक लेख व शोध-पत्र राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में विभिन्न विषयों पर प्रकाशित हो चुके हैं। 'लो बॉर्न हाइब्रिड कास्ट्स एण्ड वेबर ओरिजिन एण्ड डेवलपमेंट' नामक शोध-पत्र 'ओसीडिंग्स ऑफ दि इण्डियन हिस्ट्री कजिस' तथा 'कास्ट ऑफ दि ब्लाइट, इन वि लाइट ऑफ सोनकरस वर्क' 'व हिन्दू' न्यूज पेपर में रिव्यु प्रकाशित।
पुरस्कार एवं सम्मानः 'समन्वय श्री' सम्मान, अखिल भारतीय भाषा साहित्य सम्मेलन, भोपाल, वर्ष-2012, रविकुमार बनर्जी सम्मान, महादेवी वर्मा चेतना श्री कामना श्री सम्मान, इलाहाबाद, वर्ष-2012, अमृतलाल नागर पुरस्कार, कृति-भारत में अस्पृश्यता एक ऐतिहासिक अध्ययन, 2012-13, उत्कृष्ट हिन्दी सेवा सम्मान, विश्व हिन्दी ज्योति, कैलिफोर्निया, अमेरिका, वर्ष-2020, अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन सम्मान, विज्ञान भवन दिल्ली, वर्ष 2023, इण्टरनेशनल हिन्दी उत्कर्ष सम्मान, 2023 'फिजी गिरमिट काउन्सिल, हिन्दी टीचर्स एसोसिएशन, हिन्दी परिषद, फिजी, पन्नालाल गुप्त 'मानस' स्मृतांजलि सम्मान, प्रयागराज एवं फादर कामिल बुल्के सम्मान प्रयागराज, उत्तर प्रदेश 2025 प्राप्त। आपकी साहित्यिक सेवा की कड़ी में 'साहित्यकार डॉ. सी.एल. सोनकरः सृजन एवं आयाम' शोध-शीर्षक पर पी-एच.डी. उपाधि हेतु शोधार्थी श्रीमती अंजूकुमारी के द्वारा हिन्दी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. विनय कुमार, मगध विश्वविद्यालय, बोधगया, बिहार के निर्देशन में शोध-कार्य सम्पन्न।

सम्पर्क सूत्रः म्योर रोड, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश, भारत

ई-मेल: [email protected]

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