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Habba Ki Khoj

Author: Geetashree
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Habba Ki Khoj

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‘हब्बा की खोज’ वक़्त के सदियों लम्बे धुन्धलके में खो-सी गई, एक शायर के जीवन-चिह्नों की तलाश का ऐसा वृत्तान्त है जिसमें इतिहास, आख्यान, शायरी और यायावरी एक-दूसरे में घुल-मिल गए हैं। हब्बा ख़ातून के गीत,  उसकी कहानियाँ कश्मीर के जनमानस में आज भी गहरे रचे-बसे हैं। वह उसे ‘बुलबुल-ए-कश्मीर’ कहकर याद करता है। ये सब बातें, ज़ाहिर है, बतलाती हैं कि कश्मीरी अवाम को चौदहवीं सदी की अपनी इस शायर से कितना लगाव है। लेकिन इतिहास के दायरे में जाते ही हब्बा का मसला पेचीदा हो जाता है—उसके बारे में कहानियाँ-किंवदन्तियाँ चाहे जितनी हों, निर्विवाद स्मारक और प्रामाणिक दस्तावेज़ लगभग नहीं मिलते। उनके क़ब्र तक को लेकर मतैक्य नहीं है— कुछ लोग कश्मीर में बताते हैं तो कई दूसरे लोग बिहार में।

इस उलझन ने ही गीताश्री को प्रेरित किया और वह हब्बा के सच का पता लगाने निकल पड़ीं। उन्होंने हब्बा से जुड़ी तमाम क़िस्सों-कहानियों को इकट्ठा कर उसके जीवन की एक सिलसिलेवार तसवीर उकेरने की कोशिश की। वह कश्मीर से बिहार तक उन तमाम जगहों पर बार-बार गईं जिनका वास्ता हब्बा से बताया जाता है, और वहाँ बचे निशानों को देखा-परखा। उसके गीत-गान जुटाए। इस तरह जो कुछ हासिल हुआ उसे ही उन्होंने ‘हब्बा की खोज’ में पेश किया है।

इसमें दावों से अधिक दीवानगी नज़र आती है। और यह दीवानगी अपने मक़सद में इस तरह कामयाब हुई है कि हब्बा की टुकड़े-टुकड़े बिखरी दास्तान एक साथ जुड़कर बहुत हद तक मुकम्मल हो गई है। एक विचारोत्तेजक किताब!

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 224p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 20 X 13 X 1.5
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Geetashree

Author: Geetashree

गीताश्री

गीताश्री पत्रकार एवं लेखक हैं। अब तक उनके सात कहानी-संग्रह, छह उपन्यास और स्त्री-विमर्श पर चार शोध-पुस्तकें प्रकाशित हैं। उन्होंने कई चर्चित किताबों का सम्पादन-संयोजन किया है।

वर्ष 2008-09 में उन्हें पत्रकारिता के सर्वोच्च पुरस्कार ‘रामनाथ गोयनका सम्मान’ से सम्मानित किया गया। ‘बेस्ट हिन्दी जर्नलिस्ट ऑफ़ द इयर’ समेत अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार उन्हें प्राप्त हैं।

1991 से 2017 तक सक्रिय पत्रकारिता के बाद फ़िलहाल स्वतंत्र पत्रकारिता और लेखन।

ई-मेल : [email protected]

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