Gyarahvin-A ke Ladke

Fiction : Stories
500%
() Reviews
As low as ₹150.00
In stock
SKU
Gyarahvin-A ke Ladke
- +

गौरव सोलंकी नैतिकता के रूढ़ खाँचों में अपनी गाड़ी खींचते-धकेलते लहूलुहान समाज को बहुत अलग ढंग से विचलित करते हैं। और, यह करते हुए उसी समाज में अपने और अपने हमउम्र युवाओं के होने के अर्थ को पकड़ने के लिए भाषा में कुछ नई गलियाँ निकालते हैं जो रास्तों की तरह नहीं, पड़ावों की तरह काम करती हैं। इन्हीं गलियों में निम्न-मध्यवर्गीय शहरी भारत की उदासियों की खिड़कियाँ खुलती हैं जिनसे झाँकते हुए गौरव थोड़ा गुदगुदाते हुए हमें अपने साथ घुमाते रहते हैं। वे कल्पना की कुछ नई ऊँचाइयों तक क़‍िस्सागोई को ले जाते हैं, और अक्सर सामाजिक अनुभव की उन कंदराओं में भी झाँकते हैं, जहाँ मुद्रित हिन्दी की नैतिक गुत्थियाँ अपने लेखकों को कम ही जाने देती हैं।

इस संग्रह में गौरव की छह कहानियाँ सम्मिलित हैं, लगभग हर कहानी ने सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर एक ख़ास क़‍िस्म की हलचल पैदा की। किसी ने उन्हें अश्लील कहा, किसी ने अनैतिक, किसी ने नक़ली। लेकिन ये सभी आरोप शायद उस अपूर्व बेचैनी की प्रतिक्रिया थे, जो इन कहानियों को पढक़र होती है।

कहने का अन्‍दाज़ गौरव को सबसे अलग बनाता है, और देखने का ढंग अपने समकालीनों में सबसे विशेष। उदारीकृत भारत के छोटे शहरों और क़स्बों की नागरिक उदासी को यह युवा क़लम जितने कौशल से तस्वीरों में बदलती है, वह चमत्कृत करनेवाला है।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back, Paper Back
Publication Year 2018
Edition Year 2018, Ed. 1st
Pages 144p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan - Sarthak
Dimensions 22 X 14.5 X 1.5
Write Your Own Review
You're reviewing:Gyarahvin-A ke Ladke
Your Rating

Editorial Review

It is a long established fact that a reader will be distracted by the readable content of a page when looking at its layout. The point of using Lorem Ipsum is that it has a more-or-less normal distribution of letters, as opposed to using 'Content here

Gaurav Solanki

Author: Gaurav Solanki

गौरव सोलंकी 

कहानियाँ, कविताएँ, स्क्रीनप्ले, नॉन-फ़‍िक्शन और गाने लिखनेवाले गौरव सोलंकी का जन्म 7 जुलाई, 1986 को हुआ। बचपन संगरिया (राजस्थान) में बीता। आईआईटी रुड़की से इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन के बाद गौरव कुछ साल ‘तहलका’ के लिए सिनेमा और समाज पर भी लिखते रहे। 2014 में आई फ़‍िल्म ‘अग्ली’ के गीत लिखे। ‘फ़ैंटम फ़‍िल्म्स’ ने इनकी कहानी ‘हिसार में हाहाकार’ पर फ़‍िल्म बनाने के अधिकार भी ख़रीदे हैं। इनकी स्क्रिप्ट ‘निसार’ 2016 में ‘दृश्यम सनडैंस स्क्रीनराइटर्स लैब’ के लिए चुनी गई। अभी मुम्बई में रहते हैं।

 

Read More
Books by this Author

Back to Top