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Gorakh Sabad Prabodh

Author: Bodhisatva
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Gorakh Sabad Prabodh

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कतिपय कारणों से पिछले कुछ समय से गोरखनाथ की चर्चा एक फ़ैशन जैसी चीज़ हो गई है, जिसके चलते उनकी वाणी का वास्तविक सार कहीं पीछे चला गया है। ऐसी स्थि‌ति में उनकी रचनाओं का यह कवितान्तरण पुनः गोरख-तत्त्व के अन्वेषण की दिशा में एक प्रस्थान-बिन्दु है।

हिन्दी कव‌िता के महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षर बोधिसत्व ने इस पुस्तक में गुरु गोरखनाथ की एक सौ एक ऐसी सबदियों का कवितान्तरण किया है जो उनकी वाणी के अभिप्रायों को केन्द्रीभूत रूप में प्रस्तुत करती हैं। यह चयन न केवल काव्यान्तरण की दृष्टि से सम्भावनाशील है, बल्क‌ि कहीं न कहीं आज हमारे सामने मौजूद प्रश्नों को भी सम्बोधित करता है।

यह भी उल्लेखनीय है कि यह काव्यान्तरण केवल मूल रचना के अर्थ को नहीं बताता, उसे विस्तार देता है। गोरखवाणी में प्रयुक्त ऐसे पारिभाषिक शब्दों को, जो विस्तृत व्याख्या की अपेक्षा रखते हैं, यहाँ उन्हें यथेष्ट विस्तार दिया गया है जिससे वे न केवल सम्प्रेषणीय, बल्कि अधिक समीचीन भी हो जाते हैं।

इस काव्यान्तरण में गोरखवाणी की सूक्तिमयता का निर्वहन करते हुए बोधिसत्व अपनी काव्यात्मक व्याख्या में कुछ नई सूक्तियाँ भी रचते हैं जिससे यह पाठ और समृद्ध हो जाता है। लगभग हज़ार वर्षों के अन्तराल के चलते आज के पाठक और गोरखवाणी के बीच जो दूरी पैदा हुई है, यह प्रस्तुति उसे कम करेगी। 

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 248p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 20 X 13 X 1.5
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Bodhisatva

Author: Bodhisatva

बोधिसत्व

11 दिसम्बर, 1968 में उत्तर प्रदेश के भदोही जनपद के भिखारीरामपुर गाँव में जन्मे बोधिसत्व का मूल नाम अखिलेश कुमार मिश्र है। वे यूजीसी के फेलो रहे। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग से किया गया शोध प्रबन्ध ‘तार सप्तक कवियों की कविता और काव्य-सिद्धान्त’ पुस्तक के रूप में प्रकाशित है। उनके अब तक चार कविता-संग्रह प्रकाशित हैं, जिनके नाम हैं—‘सिर्फ़ कवि नहीं’, ‘हम जो नदियों का संगम हैं’, ‘दुःखतंत्र’ और ‘ख़त्म नहीं होती बात’। ‘महाभारत यथार्थ कथा’ नामक एक किताब पिछले दिनों चर्चित रही, जिसमें महाभारत की कथाओं के आन्तरिक सूत्रों का एक नवीन अध्ययन किया गया है। उनकी कविताओं के भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनुवाद प्रकाशित हैं। कुछ कविताएँ मास्को विश्वविद्यालय के एम.ए. के पाठ्यक्रम में शामिल हैं। बोधिसत्व साहित्य और सिनेमा दोनों में बराबर दखल रखते हैं। लगभग दो वर्ष ‘स्टार न्यूज़’ के सम्पादकीय सलाहकार रहे। दो दर्जन से अधिक टीवी धारावाहिकों और ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म के शोज़ की स्क्रिप्ट्स का प्रमुख हिस्सा रहे बोधिसत्व के क्रेडिट में ‘शिखर’ और ‘धर्म’ जैसी फ़िल्में भी शामिल हैं। पिछले दिनों स्टार प्लस पर प्रसारित हुए धारावाहिक ‘विद्रोही’ का निर्माण उन्होंने अपने प्रोडक्शन हाउस ‘गाथा प्रोडक्शंस’ से किया है। विख्यात टीवी धारावाहिक ‘देवों के देव महादेव’ के लिए शोधकार्य कर चुके हैं। उन्हें ‘भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार’, ‘संस्कृति अवार्ड’, ‘गिरिजाकुमार माथुर सम्मान’, ‘फ़िराक़ गोरखपुरी सम्मान’ समेत कई पुरस्कार प्राप्त हैं।

सम्प्रति साहित्य और सिनेमा के साथ टीवी धारावाहिक के लिए लेखन और निर्माण में व्यस्त हैं।

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