Sirf Kavi Nahi

Poetry
Author: Bodhisatwa
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Sirf Kavi Nahi
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समकालीन हिन्दी कविता के उपादान आज कुछ इतने सरल हो गये हैं कि ‘कोई कवि बन जाय, सहज सम्भाव्य है।’ कविता के इस संकट में ऊपरी तौर पर अच्छी कविताएँ लिख लेना कठिन नहीं है। लेकिन ऐसी कविता जो एक ‘नयी शुरुआत’ करे, जो अचानक ‘ताज़गी के एक अनहोनेपन’ से पाठक को अपने अनुरूप ढाल ले, ऐसी कविता कहीं नहीं दिखती। ‘ताज़गी (वस्तु और शिल्प) के इसी अनहोनेपन’ के अनुभव को व्यक्त करती हैं बोधिसत्व की कविताएँ।
बोधिसत्व की कविताएँ कविता की एक नयी भाषा की खोज में पैदा हुई हैं। गढ़ी हुई, उपलब्ध काव्य-भाषा के नकार और गैरपहचान से बोधिसत्व की काव्य-भाषा का निर्माण हुआ है। नये ढंग की अछूती बिम्ब-मालाओं के माध्यम से यह कवि अपनी बात कहता है। ऐसे शब्दों का प्रयोग कवि करता है जो हमारी संस्कृति के अछूते कोनों से आकर सहसा कविता में एक बिल्कुल नये सांस्कृतिक व्यक्तित्व की रचना करते हैं। इस तरह बोधिसत्व की कविताएँ ‘कविता के एक नये संसार को जन्म देती हैं। निपट भोलेपन के बीच एक तार्किक और जनोन्मुखी अन्तर्दृष्टि सम्पन्न ये कविताएँ अपनी विविधता में एक अद्भुत ‘कोलाज़’ की रचना करती हैं।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 1991
Edition Year 2022, Ed. 2nd
Pages 116p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 22.5 X 14.5 X 1.5
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Editorial Review

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Bodhisatwa

Author: Bodhisatwa

बोधिसत्व

मूलनाम : अखिलेश कुमार मिश्र

जन्म : 11 दिसम्बर, 1968 को उत्तर प्रदेश के भदोही ज़‍िले के सुरियावाँ थाने के एक गाँव भिखारी रामपुर में जन्म।

शिक्षा : प्रारम्भिक शिक्षा गाँव की ही पाठशाला से। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिन्दी में एम.ए. और वहीं से तार सप्तक के कवियों के काव्य-सिद्धान्त पर पीएच.डी. की उपाधि ली। यूजीसी के रिसर्च फ़ैलो रहे।

प्रकाशन : ‘सिर्फ़ कवि नहीं’ (1991), ‘हम जो नदियों का संगम हैं’ (2000), ‘दु:ख-तंत्र’ (2004), ‘ख़त्म नहीं होती बात’ (2010) ये चार कविता-संग्रह प्रकाशित हैं। ‘तारसप्तक-काव्य सिद्धान्त और कविता’ नामक शोध-प्रबन्ध (2011)। लम्बी कहानी ‘वृषोत्सर्ग’ (2005) प्रकाशित।

सम्‍पादन : ‘गुरवै नमः’ (2002), ‘भारत में अपहरण का इतिहास’ (2005), ‘रचना समय’ के ‘शमशेर जन्मशती’ अंक का सम्‍पादन (2010)।

प्रकाशनाधीन : ‘कविता की छाया में’ (लेख, समीक्षा और व्याख्या)।

अन्य लेखन : ‘शिखर’ (2005), ‘धर्म’ (2006) जैसी फ़‍िल्मों और दर्जनों टीवी धारावाहिकों का लेखन। 

सम्मान : कविता के लिए ‘भारतभूषण अग्रवाल पुरस्‍कार’, ‘गिरिजा कुमार माथुर सम्मान’, ‘संस्कृति अवार्ड’, ‘हेमन्‍त स्मृति सम्मान’, ‘फ़‍िराक़ सम्मान’, ‘शमशेर सम्मान’ आदि प्राप्त हैं।

विशेष : कुछ कविताएँ देशी-विदेशी भाषाओं में अनूदित हैं। कुछ कविताएँ मास्को विश्वविद्यालय के स्नातक के पाठ्यक्रम में पढ़ाई जाती हैं। दो कविताएँ गोवा विश्व विद्यालय के स्नातक पाठ्यक्रम में शामिल थीं।

फ़‍िलहाल : पिछले कई साल से मुम्बई में बसेरा है। सिनेमा, टेलीविज़न और पत्र-पत्रिकाओं के लिए लिखाई का काम।

ईमेल : abodham@gmail.com

ब्लॉग : http://vinay-patrika.blogspot.com

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