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Gaanv-Begaanv-Hard Cover

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9789377370053
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स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारतीय समाज में जो व्यापक परिवर्तन हुए हैं, उनसे ग्रामीण जीवन और परिवेश प्रायः अछूता रहा। गाँव में परिवर्तन की प्रक्रिया बहुत धीरे-धीरे, लेकिन बड़ी गहराई से अपने अन्तर्विरोधों के साथ दृष्टिगत हुई। यह अन्तर्विरोध एक ओर अपनी मूल पहचान को बनाए रखने के संघर्ष का है तो दूसरी ओर नए परिवर्तनों के दबाव का भी। वास्तव में वह गाँव के गाँव होने की एक प्रक्रिया है जो इस उपन्यास में सम्भवत: पहली बार अपनी पूरी धमक के साथ उभर कर आई है।

‘गाँव-बेगाँव’ की कथावस्तु समय का करवट लेता एक वास्तविक इतिहास है, जिसमें भारतीय ग्रामीण सामाजिक संरचना एवं जीवन में घटित हो रहे परिवर्तनों, विसंगतियों और वास्तविकताओं को ‘सही दृष्टिकोण’ से देखा गया है। वह आज के किसी भी गाँव की कहानी हो सकती है, क्योंकि इतिहास की पीठ पर उभरती नई वास्तविकताओं और परिवर्तनों को किसी भी शर्त पर बरगलाया नहीं जा सकता। उसे तो समय अपने पन्नों पर बड़े कायदे से समेटे हुए लगातार चलता जा रहा है।

राजेन्द्र प्रसाद पांडेय की लोकजीवन की सूक्ष्म, गहरी और प्रामाणिक जानकारी ने हिन्दी कथा जगत में पहली बार ग्रामीण संवेदनाओं के विविध पहलुओं को इतनी बारीकी और विस्तार से प्रस्तुत किया है। ‘गाँव-बेगाँव’ भारतीय गाँवों के न केवल सुख-दुख को अपनी पूरी बेचैनी के साथ हमारे सामने रखता है, बल्कि आंचलिक परिवेश पर आधारित उपन्यासों की प्रचलित सभ्यता के तिलिस्म को भी तोड़कर एक नये स्वाद से हमें परिचित कराता है। 

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 184p
Price ₹695.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 1.5
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Rajendra Prasad Pandey

Author: Rajendra Prasad Pandey

राजेन्द्र प्रसाद पांडेय

राजेन्द्र प्रसाद पांडेय का जन्म 25 जून, 1947 को अर्का, कौशांबी, उत्तर प्रदेश में हुआ। उन्होंने एम.ए.,पी-एच.डी. (हिन्दी) और साहित्याचार्य (संस्कृत) की उपाधि प्राप्त की। भाषा-विज्ञान में डिप्लोमा किया। कुछ समय असिस्टेंट प्रोफेसर रहे। फिर प्रशासनिक सेवा में आ गए। विभिन्न वरिष्ठ पदों पर रहते हुए प्रमुख सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए। हिन्दी में प्रकाशित उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—‘गाँव-बेगाँव’ (उपन्यास); ‘फरिश्ते’ (कहानी-संग्रह); ‘फूटती नदी’, ‘नदी में नदी’, ‘नदी चक्र’, ‘लड़कियाँ हैं तो’ (कविता-संग्रह); ‘नदिया नाव संजोग’ (संस्मरण); ‘साहित्य का आभामंडल’, ‘प्रीति न करियो कोय’, (ललित निबन्ध), ‘रचना और आज की चुनौतियाँ’, ‘हिन्दी कहानी : संवेदना और शिल्प’, ‘हिन्दी और देवनागरी’ (समालोचना)। प्रमुख संस्कृत कृतियाँ हैं—‘वेदमहत्त्वम्’, ‘कर्म विमर्श:’, ‘लौकिक रुद्राष्टाध्यायी’, ‘कालिदास का फलितार्थ’, ‘जीवनचिंतनम्’, ‘नवदृष्टि गीता’; ‘विश्व लघुकथावली’ (सम्पादन)। साहित्यिक पत्रिका ‘नान्दी’ का सन् 1986 से सम्पादन किया।  उपन्यास ‘गाँव-बेगाँव’ उ.प्र. हिन्दी संस्थान  द्वारा पुरस्कृत। उन्हें ‘साहित्य शिरोमणि सम्मान’ से भी सम्मानित किया गया।

26 अगस्त, 2019 को उनका निधन हुआ।

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