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Ladkiyaan Hain To

Edition: 2025, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Ladkiyaan Hain To

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राजेन्द्र प्रसाद पांडेय की कविताओं की दुनिया काफी बड़ी और वैविध्यपूर्ण है। उनमें मनुष्य से लेकर पशु-पक्षियों और अन्य प्राणियों के प्रति भी संवेदना प्रकट हुई है। उनमें सरकारी योजनाओं की निरर्थकता और जनता की स्वार्थ-भावना का भी चित्रण हुआ है। ‘अधबना पुल, ईंटें और पुलघाट’ उनकी ऐसी ही कविता है, जिसमें व्यवस्था की नीतियों का पर्दाफाश हुआ है। ‘परबाबा की विदाई’ में मनुष्य की जिजीविषा, इच्छाओं और ​सद् विचारों का अच्छा चित्रण हुआ है। ‘सुख के दुख’, ‘कहाँ हो नन्दिता कँवर’, ‘बीज’, ‘दुख है पहचान का मरना’, ‘संस्कार युद्ध’, ‘लालन-पालन’, ‘नाच रही हो माँ’, ‘बेटी’, ‘रक्षाबन्धन पर दीदी को प्रणाम’, ‘पीपल को प्रणाम’ आदि उनकी बेहतरीन कविताएँ हैं। ये कविताएँ एक तरफ मानवीय मूल्यों और रिश्तों को सींचती हैं तो दूसरी तरफ हमारे समय की शिनाख्त करती हैं। साथ ही हमें जगाती और सचेत भी करती हैं।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 116P
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 1.5
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Rajendra Prasad Pandey

Author: Rajendra Prasad Pandey

राजेन्द्र प्रसाद पांडेय

राजेन्द्र प्रसाद पांडेय का जन्म 25 जून, 1947 को अर्का, कौशांबी, उत्तर प्रदेश में हुआ। उन्होंने एम.ए.,पी-एच.डी. (हिन्दी) और साहित्याचार्य (संस्कृत) की उपाधि प्राप्त की। भाषा-विज्ञान में डिप्लोमा किया। कुछ समय असिस्टेंट प्रोफेसर रहे। फिर प्रशासनिक सेवा में आ गए। विभिन्न वरिष्ठ पदों पर रहते हुए प्रमुख सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए। हिन्दी में प्रकाशित उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—‘गाँव-बेगाँव’ (उपन्यास); ‘फरिश्ते’ (कहानी-संग्रह); ‘फूटती नदी’, ‘नदी में नदी’, ‘नदी चक्र’, ‘लड़कियाँ हैं तो’ (कविता-संग्रह); ‘नदिया नाव संजोग’ (संस्मरण); ‘साहित्य का आभामंडल’, ‘प्रीति न करियो कोय’, (ललित निबन्ध), ‘रचना और आज की चुनौतियाँ’, ‘हिन्दी कहानी : संवेदना और शिल्प’, ‘हिन्दी और देवनागरी’ (समालोचना)। प्रमुख संस्कृत कृतियाँ हैं—‘वेदमहत्त्वम्’, ‘कर्म विमर्श:’, ‘लौकिक रुद्राष्टाध्यायी’, ‘कालिदास का फलितार्थ’, ‘जीवनचिंतनम्’, ‘नवदृष्टि गीता’; ‘विश्व लघुकथावली’ (सम्पादन)। साहित्यिक पत्रिका ‘नान्दी’ का सन् 1986 से सम्पादन किया।  उपन्यास ‘गाँव-बेगाँव’ उ.प्र. हिन्दी संस्थान  द्वारा पुरस्कृत। उन्हें ‘साहित्य शिरोमणि सम्मान’ से भी सम्मानित किया गया।

26 अगस्त, 2019 को उनका निधन हुआ।

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